रूस पर अमेरिकी प्रतिबंध बिल सीनेट से पास, भारत पर 100% तक टैरिफ का खतरा; ट्रंप को मिल सकती है बड़ी ताकत
वॉशिंगटन, 8 अगस्त 2026। रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से अमेरिका में लाए गए नए प्रतिबंध विधेयक को सीनेट ने भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ नाम वाले इस बिल के पक्ष में 86 सीनेटरों ने मतदान किया, जबकि 11 ने विरोध किया।
भारत पर 100% तक टैरिफ का प्रावधान
बिल का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान उन देशों पर कार्रवाई से जुड़ा है, जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदते हैं। प्रस्तावित कानून राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ऐसे देशों से आने वाले सामान पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है। भारत और चीन इसके प्रमुख संभावित निशाने पर हैं।
हालांकि, भारत पर 100% टैरिफ अपने-आप लागू नहीं होगा। पहले इस विधेयक को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से भी मंजूरी मिलनी होगी और उसके बाद राष्ट्रपति की कार्रवाई आवश्यक होगी। रिपोर्टों के अनुसार प्रतिनिधि सभा 31 अगस्त को अवकाश से लौटने के बाद इस पर आगे विचार कर सकती है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बिल?
भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि रूस से ऊर्जा खरीद जारी रहने से मॉस्को को राजस्व मिलता है, जबकि रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है। इसी वजह से अमेरिका रूस के ऊर्जा खरीदार देशों पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
ट्रंप को मिलेगी ज्यादा ताकत
बिल कानून बनता है तो ट्रंप के पास रूस पर आर्थिक दबाव डालने के साथ-साथ रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदार देशों के खिलाफ भी टैरिफ लगाने का स्पष्ट वैधानिक अधिकार होगा। हालांकि अमेरिकी सांसदों के बीच इस बात को लेकर भी चिंता है कि इतने व्यापक टैरिफ अधिकारों से अमेरिका में आयात महंगा हो सकता है और व्यापारिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
फिलहाल स्थिति यह है कि सीनेट ने बिल पास कर दिया है, लेकिन भारत पर 100% टैरिफ अभी लागू नहीं हुआ है। अगला महत्वपूर्ण पड़ाव अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में इसकी मंजूरी है।



