रायगढ़ : ‘मेरा रेशम, मेरा अभियान 2.0’ से टसर किसानों को मिला वैज्ञानिक प्रशिक्षण, 300 हितग्राही हुए शामिल
रोग प्रबंधन से लेकर उन्नत बीज और अंतरफसल खेती तक दी गई जानकारी, क्लस्टर आधारित उत्पादन बढ़ाने पर जोर
रायगढ़। टसर रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से रायगढ़ जिले में ‘मेरा रेशम, मेरा अभियान 2.0’ के तहत जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। 2 और 3 सितंबर को जिले के विभिन्न टसर रेशम केंद्रों में हुए कार्यक्रमों में करीब 300 महिला स्व-सहायता समूहों, टसर कृमिपालकों और सिल्क समग्र योजना के हितग्राहियों ने भाग लिया।
वैज्ञानिक तरीके से कृमिपालन पर फोकस
अभियान के दौरान किसानों को उन्नत बीज के माध्यम से वैज्ञानिक पद्धति से टसर कृमिपालन करने की जानकारी दी गई। इसके साथ ही अंतरफसल को अपनाकर मौजूदा कृषि गतिविधियों से अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।
प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीकों से जोड़कर टसर उत्पादन और उससे होने वाली आय में वृद्धि के लिए तैयार करना रहा।
कई टसर केंद्रों के किसानों से हुआ सीधा संवाद
कार्यक्रम के तहत सम्बलपुरी, बंगुरसिया, जुर्डा, कोटरापाली और सुकुलभठली स्थित रेशम केंद्रों से जुड़े किसानों के साथ संवाद किया गया।
वहीं हाटी, मुनुन्द, बेहरामार और जोगड़ा क्षेत्र के किसानों को भी टसर उत्पादन से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी दी गई। किसानों से उनकी समस्याओं और सुझावों पर चर्चा कर स्थानीय स्तर पर उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों को समझने का प्रयास किया गया।
टसर में रोग प्रबंधन की दी गई जानकारी
प्रशिक्षण का एक प्रमुख हिस्सा टसर कृमियों में होने वाली बीमारियों की पहचान और उनसे बचाव रहा। विशेष रूप से ग्रेसरी बीमारी से बचाव के उपायों पर किसानों को जानकारी दी गई।
किसानों को रोग के शुरुआती लक्षणों की पहचान, स्वच्छता और पालन के दौरान आवश्यक सावधानियों के बारे में बताया गया, ताकि बीमारी के कारण होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
चाकी कीटपालन और सेनीटेक के इस्तेमाल का प्रशिक्षण
कार्यक्रम में चाकी कीटपालन के दौरान रोग प्रबंधन पर भी जानकारी दी गई। किसानों को सेनीटेक के उपयोग की व्यावहारिक प्रक्रिया समझाई गई, ताकि पालन केंद्रों में स्वच्छता और रोग नियंत्रण को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके।
उन्नत बीज और क्लस्टर खेती पर जोर
प्रशिक्षण में किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं उन्नत बीज के उपयोग के साथ क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा देने के संबंध में जानकारी दी गई। विभाग का जोर ऐसे समूहों के माध्यम से टसर उत्पादन के प्रभावी क्षेत्रों को विकसित करने पर है।
इसके साथ ही जिन क्षेत्रों में वर्तमान में उत्पादन की संभावनाएं कम हैं, वहां नए पौधरोपण के माध्यम से टसर उत्पादन का क्षेत्र बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
अंतरफसल से अतिरिक्त आय के विकल्प बताए
किसानों को टसर आधारित खेती के साथ अंतरफसल अपनाने की तकनीक समझाई गई। इसके तहत अलग-अलग फसलों को उचित तरीके से शामिल कर अतिरिक्त आय प्राप्त करने की संभावनाओं और संभावित आर्थिक लाभ पर चर्चा की गई।
विभागीय अधिकारियों ने किसानों को पौधरोपण और अंतरफसल की ऐसी तकनीकों की जानकारी दी, जिन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाया जा सकता है।
केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक ने दिया प्रशिक्षण
सम्बलपुरी रेशम केंद्र में आयोजित प्रशिक्षण में केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक वाई.एस. श्रीनाथ ने किसानों को रोग प्रबंधन एवं पालन तकनीकों की जानकारी दी।
इस दौरान रायगढ़ रेशम विभाग के उप संचालक मनीष पवार, फील्ड ऑफिसर राम खिलावन करियाम, वरिष्ठ रेशम निरीक्षक विकास पटेल, कनिष्ठ रेशम निरीक्षक चन्द्रिका प्रसाद श्रीवास सहित विभागीय कर्मचारियों ने कार्यक्रम में सहयोग किया।
किसानों के सुझावों को आगामी योजना में शामिल करने की तैयारी
प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने टसर पालन और उत्पादन से जुड़ी अपनी समस्याएं एवं सुझाव अधिकारियों के सामने रखे। विभाग की ओर से इन सुझावों को आगामी कार्ययोजना में शामिल करने की बात कही गई है।
अभियान के माध्यम से जिले में टसर रेशम उत्पादन को तकनीकी रूप से मजबूत करने, प्रभावी क्षेत्र का विस्तार करने और किसानों की आजीविका को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।












