बोर्ड को लेकर उठी शिकायत पर आवेदक ने दी सफाई, कहा—स्ट्रक्चर इंजीनियर का प्रमाणपत्र और 10 लाख का बीमा भी संलग्न

रायगढ़। चक्रधर नगर चौक स्थित विनय चावला के भवन में लगाए गए बोर्ड को लेकर सामने आई शिकायत के बाद संबंधित आवेदक ने दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष स्पष्ट किया है। आवेदक का कहना है कि इस संबंध में 23 जून 2026 को विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसमें अंतिम 13 नंबर के आवेदन में चक्रधर नगर चौक स्थित विनय चावला के भवन का उल्लेख किया गया है।


आवेदक के अनुसार, आवेदन के साथ स्ट्रक्चर इंजीनियर का प्रमाणपत्र भी संलग्न किया गया है, जिसमें बोर्ड की संरचना को सुरक्षित बताया गया है। इसके अलावा बोर्ड से किसी व्यक्ति को संभावित नुकसान होने की स्थिति को देखते हुए 10 लाख रुपये का बीमा भी कराया गया है। ऐसे में बोर्ड को असुरक्षित बताए जाने संबंधी किसी भी शिकायत पर आवेदक ने सवाल उठाते हुए कहा है कि सभी आवश्यक दस्तावेज और सुरक्षा संबंधी प्रमाण आवेदन के साथ उपलब्ध हैं।


शिकायतकर्ता के नाम को लेकर भी उठाए सवाल

मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात शिकायत में दर्ज कथित शिकायतकर्ताओं के नाम को लेकर सामने आई है। आवेदक का कहना है कि शिकायतकर्ता के रूप में पहला नाम शरद महापात्र का दर्ज किया गया है, जबकि उनका कहना है कि शरद महापात्र ने स्वयं ऐसी शिकायत की जानकारी से अनभिज्ञता जताई है।


इसी तरह शिकायत में दूसरे नाम के रूप में अनिल गर्ग का नाम होने का भी उल्लेख किया गया है। आवेदक के मुताबिक अनिल गर्ग ने भी स्पष्ट किया है कि उन्होंने उक्त शिकायत पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
आवेदक का कहना है कि यदि शिकायत में जिन लोगों के नाम दर्ज हैं, वे स्वयं शिकायत करने या उस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर रहे हैं, तो शिकायत की वास्तविकता और उसमें दर्ज नामों की जांच किया जाना आवश्यक है।


अन्य दुकानदारों के हस्ताक्षर भी बताए जा रहे प्रमाण


आवेदक ने अपने पक्ष में शरद महापात्र और अनिल गर्ग सहित अन्य दुकानदारों के हस्ताक्षर वाले दस्तावेजों को भी महत्वपूर्ण प्रमाण बताया है। उनका कहना है कि संबंधित सभी दस्तावेज और हस्ताक्षर के प्रमाण उपलब्ध हैं, जिन्हें उन्होंने व्हाट्सऐप के माध्यम से संबंधित लोगों तक पहुंचाया है।


आवेदक ने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि 23 जून 2026 को दिए गए आवेदन, स्ट्रक्चर इंजीनियर के प्रमाणपत्र, 10 लाख रुपये के बीमा तथा शिकायत में दर्ज नामों और हस्ताक्षरों की वास्तविकता की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल मामला शिकायत में दर्ज नामों और संबंधित व्यक्तियों के कथित तौर पर शिकायत से अनभिज्ञ होने के दावे के कारण चर्चा में है। ऐसे में दस्तावेजों की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

Back to top button