रायपुर: CGPSC मामले में पूर्व OSD चेतन बोरघरिया गिरफ्तार, ED को मिली छह दिन की रिमांड

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य के प्रशासनिक अधिकारी चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया है। बोरघरिया पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में OSD के रूप में भी काम कर चुके हैं। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष PMLA अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां ED ने पूछताछ के लिए रिमांड मांगी।

2020-21 की CGPSC परीक्षाओं से जुड़ी जांच

ED की कार्रवाई CGPSC की वर्ष 2020 और 2021 की परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी से जुड़ी जांच का हिस्सा है। एजेंसी ने इस मामले में पहले भी कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है।

ED के अनुसार जांच में परीक्षा से जुड़े कथित आर्थिक लेन-देन और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोपों की पड़ताल की जा रही है।

सितंबर की शुरुआत में हुई थी छापेमारी

चेतन बोरघरिया के खिलाफ कार्रवाई से पहले ED ने 1 सितंबर 2026 को उनके बलरामपुर और धमतरी स्थित परिसरों में तलाशी ली थी। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों को जांच का हिस्सा बनाया गया।

इसके बाद उनसे एजेंसी ने पूछताछ की और 11 सितंबर को उन्हें PMLA के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।

बैंक लेन-देन और डिजिटल डिवाइस जांच के दायरे में

ED का दावा है कि बोरघरिया के बैंक रिकॉर्ड और जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की जांच में उत्कर्ष चंद्राकर के साथ लेन-देन से जुड़े तथ्य सामने आए हैं। एजेंसी इन्हीं कड़ियों के आधार पर कथित मनी ट्रेल की पड़ताल कर रही है।

मामले में जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कथित अवैध रकम का स्रोत क्या था और उसका इस्तेमाल किन लोगों या गतिविधियों में किया गया।

इस मामले में पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी

चेतन बोरघरिया इस जांच में ED द्वारा गिरफ्तार किए गए तीसरे आरोपी बताए जा रहे हैं। इससे पहले एजेंसी ने तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और पूर्व मुख्यमंत्री के तत्कालीन PA के भतीजे उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया था।

ED की जांच CBI और छत्तीसगढ़ EOW से जुड़े पूर्ववर्ती मामलों के आधार पर आगे बढ़ रही है।

2021 परीक्षा को लेकर गंभीर आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार CGPSC 2021 परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक और चयन प्रक्रिया में कथित हेरफेर के आरोप हैं। ED ने दावा किया है कि कुछ अभ्यर्थियों से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के बदले कम से कम 3.2 करोड़ रुपये, मुख्य रूप से नकद, लिए जाने की जानकारी जांच में सामने आई है। इन दावों की जांच न्यायिक प्रक्रिया के तहत जारी है।

ED आगे भी खंगालेगी आर्थिक कड़ियां

चेतन बोरघरिया की रिमांड के दौरान ED उनसे कथित लेन-देन, डिजिटल उपकरणों में मिले रिकॉर्ड और मामले से जुड़े अन्य लोगों के साथ संपर्क के संबंध में पूछताछ कर सकती है।

जांच आगे बढ़ने के साथ कथित मनी ट्रेल और CGPSC मामले में आर्थिक लेन-देन से जुड़ी अन्य कड़ियों के सामने आने की संभावना है।

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