खरसिया के बरभौना में 50 लाख की संपत्ति और बीमा क्लेम पर घमासान: एक मृतक, दो पत्नियों का दावा और वित्तीय संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

कुड़ेकेला :- खरसिया क्षेत्र के ग्राम बरभौना से एक बेहद उलझा हुआ और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। दिवंगत टेकचंद डनसेना की असामयिक मृत्यु के बाद उनकी लगभग 50 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति, हार्वेस्टर, बोलेरो और कार के मालिकाना हक तथा बीमा क्लेम को लेकर गहरा विवाद खड़ा हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्व. टेकचंद डनसेना की असली कानूनी वारिस कौन हैं — उनकी बेवा पत्नी जमुना बाई डनसेना या फिर खुद को पत्नी बताने वाली पायल अग्रवाल?

फर्जीवाड़े का बड़ा आरोप और सामने आया सच

मामले में उस वक्त सनसनी फैल गई जब स्व. टेकचंद डनसेना के नाम पर दर्ज वाहनों और हार्वेस्टर का बीमा क्लेम और मालिकाना हक हासिल करने के लिए पायल अग्रवाल नाम की एक महिला ने दस्तावेजों के साथ दावा पेश किया। आरोप है कि पायल अग्रवाल ने इंश्योरेंस कंपनी के सामने खुद को मृतक की पत्नी बताकर कागजी प्रक्रिया शुरू की थी।

लेकिन जब बीमा कंपनी और वित्तीय संस्था के अधिकारी जमीनी हकीकत की पड़ताल करने के लिए सीधे ग्राम बरभौना पहुंचे, तो वहां का सच कुछ और ही निकला। गांव में टेकचंद डनसेना की असली और वैध पत्नी जमुना बाई डनसेना अपने दो मासूम बच्चों के साथ मौजूद मिलीं। इसके बाद से यह सवाल सबसे अहम हो गया है कि यदि जमुना बाई ही टेकचंद की धर्मपत्नी हैं, तो पायल अग्रवाल किस आधार पर खुद को पत्नी बताकर लाखों के क्लेम पर दावा ठोक रही थी?

केनरा बैंक और चोला मंडल फाइनेंस की भूमिका संदेह के घेरे में

लगभग 50 लाख रुपये की इस भारी-भरकम संपत्ति, बोलेरो कार और महंगे हार्वेस्टर की खरीद के लिए दिए गए लोन और दस्तावेजों के दौरान केनरा बैंक और चोला मंडल फाइनेंस द्वारा की गई कागजी कार्रवाई अब पूरी तरह जांच के दायरे में आ गई है। इस पूरे प्रकरण में निम्नलिखित गंभीर सवाल उठ रहे हैं:

  • क्या बैंक और फाइनेंस कंपनियों द्वारा लोन स्वीकृत करते समय गारंटरों, आश्रितों और पारिवारिक दस्तावेजों (KYC) का सत्यापन पूरी तरह लापरवाही से किया गया था?
  • बीमा क्लेम और फाइनेंस ट्रांसफर की प्रक्रिया में संबंधित कंपनियों के अधिकारियों की क्या भूमिका रही, और क्या इसमें किसी अंदरूनी सांठगांठ या मिलीभगत से इनकार किया जा सकता है?
  • बिना पुख्ता दस्तावेजों के दूसरे दावेदार को लाभ पहुंचाने का प्रयास किसके इशारे पर किया जा रहा था?

छाल थाने में लिखित शिकायत और न्याय की गुहार

पायल अग्रवाल के कथित फर्जी और भ्रामक दावों से आहत होकर बेवा जमुना बाई डनसेना ने अपने और अपने मासूम बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए अंततः पुलिस की शरण ली है। जमुना बाई ने छाल थाने में लिखित आवेदन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच कराने, फर्जी क्लेम करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा अपनी 50 लाख रुपये की संपत्ति व वाहन वापस दिलाने की पुरजोर मांग की है।

फिलहाल स्थानीय पुलिस इस पूरे मामले की विभिन्न एंगल से जांच कर रही है। पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही इस उलझी हुई गुत्थी और 50 लाख रुपये के इस बड़े खेल के तमाम राज से पर्दा उठ सकेगा कि इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।

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