झीरम घाटी मामले में आदिवासी समाज का बड़ा फैसला: NIA कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में देगा चुनौती, हर परिवार से जुटाएगा 20 रुपये
जगदलपुर। झीरम घाटी मामले में NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद सर्व आदिवासी समाज ने अब कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। समाज ने फैसला किया है कि अदालत के आदेश को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। इसके लिए बस्तर संभाग के आदिवासी परिवारों से स्वैच्छिक रूप से 20-20 रुपये का सहयोग जुटाने की योजना बनाई गई है।
शुक्रवार को कोया समाज भवन में आयोजित बैठक में बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों के समाज पदाधिकारी और प्रभावित परिवारों के सदस्य शामिल हुए। बैठक में NIA कोर्ट के फैसले पर चर्चा के साथ आगे की कानूनी रणनीति पर विचार किया गया।
फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी
NIA की विशेष अदालत ने 16 सितंबर को झीरम घाटी मामले में दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों को मृत्युदंड सुनाया था। अदालत ने दोषियों को हाईकोर्ट में अपील के लिए 30 दिन का समय दिया है।
सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर के मुताबिक बैठक में तय किया गया कि फैसले से संबंधित दस्तावेजों और कानूनी पहलुओं की समीक्षा कर हाईकोर्ट में अपील की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
समाज की ओर से इस कानूनी प्रक्रिया में होने वाले खर्च के लिए प्रत्येक आदिवासी परिवार से 20 रुपये का सहयोग लेने की बात कही गई है।
झीरम की पूरी साजिश की दोबारा जांच की मांग
बैठक में समाज ने झीरम घाटी हमले की कथित व्यापक साजिश और घटना में शामिल लोगों की भूमिका की दोबारा जांच की मांग भी उठाई। पदाधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
इसके साथ ही आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों की भूमिका की भी दोबारा जांच करने की मांग की गई। समाज ने पुनर्वास नीति के तहत ऐसे लोगों को मिल रही सुविधाओं की समीक्षा की मांग भी रखी।
जेल में बंद आदिवासियों के मामलों में भी कानूनी मदद
बैठक में जेलों में बंद उन आदिवासियों के मामलों को भी उठाने का निर्णय लिया गया, जिन्हें समाज निर्दोष मानता है। ऐसे मामलों में कानूनी लड़ाई जारी रखने और आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला
झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादी हमला हुआ था। दरभा क्षेत्र में हुए इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे।
मृतकों में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कई नेता और सुरक्षाकर्मी शामिल थे।
NIA ने मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद बड़ी संख्या में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की। ट्रायल का सामना कर रहे 11 आरोपियों में से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई, जबकि बाकी 10 को सितंबर 2026 में दोषी ठहराया गया और बाद में मृत्युदंड सुनाया गया।
अब हाईकोर्ट में होगी अगली कानूनी लड़ाई
NIA कोर्ट के फैसले के बाद अब इस मामले में अगला महत्वपूर्ण चरण हाईकोर्ट की अपील प्रक्रिया होगी। सर्व आदिवासी समाज ने भी इस प्रक्रिया में आगे बढ़ने का निर्णय लिया है।
समाज का कहना है कि वह झीरम घाटी की घटना से जुड़े अन्य पहलुओं, कथित साजिश और विभिन्न लोगों की भूमिका की जांच की मांग को भी कानूनी स्तर पर उठाता रहेगा।











