SIR को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत तेज, सीएम साय बोले- मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया
रायपुर। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों की खबर सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ में भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कई बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR समेत आयोग के सभी निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।
इस मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य सूची में आवश्यक सुधार करना है। उन्होंने कहा कि यदि गलत या अपात्र नामों को हटाकर मतदाता सूची को दुरुस्त किया जाता है, तो इसमें आपत्ति की कोई वजह नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण कोई नई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि निर्वाचन आयोग समय-समय पर यह कार्य करता रहा है। उनके अनुसार SIR से संबंधित निर्णय सभी चुनाव आयुक्तों की सहमति से ही लिए गए हैं।
अरुण साव ने कांग्रेस के आरोपों पर उठाए सवाल
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भी SIR को लेकर कांग्रेस के विरोध पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक मतदाता सूची का पुनरीक्षण पहले भी अलग-अलग समय पर होता रहा है और इसे लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है।
कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
वहीं प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, संधू और जोशी ने मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता सूची के डेटाबेस के संचालन जैसे मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में कम से कम 14 ऐसी आपत्तियों का उल्लेख है।
कांग्रेस ने इन रिपोर्टों के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, निर्वाचन आयोग की ओर से इन आरोपों के जवाब में कहा गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से उठाए गए सवाल और सुझाव प्रक्रिया के मसौदा स्तर से संबंधित थे और अंतिम निर्णय आयोग ने सर्वसम्मति से लिए।
SIR को लेकर आगे भी जारी रह सकती है राजनीतिक बहस
SIR को लेकर एक ओर निर्वाचन आयोग अपने फैसलों को सर्वसम्मत बता रहा है, वहीं विपक्षी दल आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में मतदाता पुनरीक्षण की प्रक्रिया, नाम जोड़ने-हटाने के नियम और आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों को लेकर राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।











