रायगढ़ राजस्व विभाग पर गंभीर सवाल: अधूरे दस्तावेज, अतिरिक्त शुल्क वसूली और आवेदक के ‘निवेदन’ को बताया ‘नाटक’
रायगढ़। छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता के तहत पुराने राजस्व प्रकरण की सत्य प्रतिलिपि हासिल करने के लिए एक आवेदक को कलेक्ट्रेट की नकल शाखा से लेकर अपर कलेक्टर तक का चक्कर लगाना पड़ा। आवेदक भानु प्रताप मिश्र ने आरोप लगाया है कि निर्धारित शुल्क जमा करने के बावजूद उन्हें अधूरे दस्तावेज दिए गए और फोटोकॉपी व अन्य मदों के नाम पर अतिरिक्त राशि ली गई। मामले के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
100 रुपये की रसीद के बाद 300 रुपये अतिरिक्त लेने का आरोप
आवेदक के अनुसार, उन्होंने 8 सितंबर 2026 को वर्ष 1966-67 के एक पुराने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व प्रकरण की समस्त दस्तावेजों की सत्य प्रतिलिपि के लिए आवेदन किया था। इसके लिए 100 रुपये की रसीद भी कटाई गई।
आरोप है कि अगले दिन नकल शाखा में प्रिंटर खराब होने की बात कहते हुए बाहर से फोटोकॉपी कराने के नाम पर 300 रुपये अतिरिक्त लिए गए। इसके बाद भी संबंधित प्रकरण के पूरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
पुराने आदेश की प्रति देने से इनकार का आरोप
आवेदक का कहना है कि जब उन्होंने अधूरे दस्तावेज दिए जाने पर सवाल किया तो नकल शाखा के कर्मचारी ने कथित तौर पर कहा कि फाइल में संलग्न तत्कालीन कलेक्टर और कमिश्नर के आदेश की सत्य प्रतिलिपि देने पर उनके निलंबित होने की स्थिति बन सकती है।
इसके बाद आवेदक ने मामले को लेकर विधि विशेषज्ञों से सलाह लेने का दावा किया।
RTI के जरिए मांगी जानकारी
दस्तावेज हासिल करने के लिए आवेदक ने 16 सितंबर 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन दिया। इसके बाद जिला जनसूचना अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर शिल्पा भगत द्वारा आवेदन को RTI अधिनियम की धारा 6(3) के तहत तहसीलदार एवं सहायक जनसूचना अधिकारी को स्थानांतरित किए जाने की जानकारी दी गई। आवेदक को इसकी सूचना 25 सितंबर को मिली।
अपर कलेक्टर के सामने पहुंचा मामला
आवेदक के मुताबिक, वह लिखित सूचना लेकर अपर कलेक्टर रवि राही के पास पहुंचा। उनकी शिकायत पर नकल शाखा के कर्मचारी को बुलाकर पुराने प्रकरण की सत्यापित प्रतियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
हालांकि, आवेदक का आरोप है कि जब उसने अपनी बात आगे रखने का प्रयास किया तो उसके निवेदन को ‘नाटक’ कहकर टाल दिया गया।
उठ रहे हैं कई सवाल
पूरे मामले को लेकर आवेदक ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। मुख्य सवाल हैं—
- क्या निर्धारित शुल्क के बावजूद अतिरिक्त राशि लेना नियमों के अनुरूप था?
- पुराने राजस्व प्रकरण की संपूर्ण सत्य प्रतिलिपि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया क्या है?
- यदि किसी दस्तावेज की प्रति देने से कानूनी बाधा थी, तो उसका स्पष्ट आधार आवेदक को बताया गया या नहीं?
- RTI आवेदन को संबंधित अधिकारी को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई या नहीं?
- किसी नागरिक के निवेदन को ‘नाटक’ कहना क्या लोकसेवा के निर्धारित आचरण के अनुरूप है?
हालांकि, अतिरिक्त वसूली, दस्तावेज रोकने या अधिकारियों द्वारा नियमों के उल्लंघन के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
