महतारी वंदन से ड्रोन दीदी तक: छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए खुल रहे आत्मनिर्भरता के नए रास्ते

रायपुर, 29 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं के जरिए आर्थिक सहायता के साथ-साथ कौशल, तकनीक और स्वरोजगार के अवसरों पर भी जोर दिया जा रहा है। महतारी वंदन योजना, नमो ड्रोन दीदी, दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना और लखपति दीदी अभियान के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाएं अपनी आय के साधन विकसित कर रही हैं।

महतारी वंदन से मिला आर्थिक सहारा

महतारी वंदन योजना के तहत पात्र विवाहित महिलाओं को डीबीटी के माध्यम से हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। हर महीने मिलने वाली राशि का उपयोग महिलाएं घरेलू जरूरतों, बच्चों की देखभाल और छोटे काम-धंधों में कर रही हैं।

सरगुजा जिले के ग्राम कर्रा-पाटीपारा की राखी इसका एक उदाहरण हैं। पति की मौत के बाद दो बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रहीं राखी योजना से मिलने वाली सहायता का इस्तेमाल बच्चों के पोषण और सिलाई सामग्री खरीदने में करती हैं। खेती के साथ वह गांव की महिलाओं के कपड़े सिलकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रही हैं।

खेतों में ड्रोन उड़ा रहीं महिलाएं

महिला स्व-सहायता समूहों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने के लिए नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षित महिलाएं खेतों में उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव जैसी सेवाएं दे रही हैं।

केंद्र सरकार के अनुसार योजना में चयनित महिला SHG को ड्रोन पैकेज की लागत का 80 प्रतिशत तक, अधिकतम 8 लाख रुपये तक वित्तीय सहायता का प्रावधान है।

जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ क्षेत्र की हेमलता मनहर भी ड्रोन दीदी के रूप में काम कर रही हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ड्रोन से कृषि कार्यों में सेवाएं देकर वह सालाना करीब 1 से 2 लाख रुपये तक आय अर्जित कर रही हैं।

ई-रिक्शा से स्वरोजगार का अवसर

महिला श्रमिकों को परिवहन के क्षेत्र में स्वरोजगार से जोड़ने के लिए दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना संचालित की जा रही है। योजना के तहत पात्र पंजीकृत महिला श्रमिकों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए सहायता का प्रावधान है।

ग्राम झलमला की सेवती ठाकुर ने आर्थिक सहायता और बैंक ऋण की मदद से ई-रिक्शा खरीदा। वह इसका इस्तेमाल अपने कैंटीन व्यवसाय के लिए सामान लाने-ले जाने में कर रही हैं, जिससे परिवहन पर होने वाला खर्च कम हुआ है।

लखपति दीदी अभियान से बढ़ी आय

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को पशुपालन, खेती, हस्तशिल्प, लघु वनोपज प्रसंस्करण और छोटे व्यवसायों से जोड़ा जा रहा है। लखपति दीदी अभियान का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की वार्षिक आय को कम से कम एक लाख रुपये के स्तर तक पहुंचाना है।

कोरिया जिले की कांति साहू ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर दोना-पत्तल निर्माण, धान बीज केंद्र, मैचिंग सेंटर और सिलाई केंद्र जैसे काम शुरू किए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन गतिविधियों से वह अपने पति के सहयोग से प्रतिमाह करीब 30 से 35 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं।

सहायता से आगे बढ़कर आय और कौशल पर जोर

इन पहलों में महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देने के साथ तकनीकी प्रशिक्षण, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने पर भी जोर दिखाई देता है। एक ओर महतारी वंदन योजना आर्थिक सहारा देती है, वहीं ड्रोन दीदी आधुनिक कृषि तकनीक, ई-रिक्शा योजना परिवहन आधारित स्वरोजगार और लखपति दीदी अभियान ग्रामीण उद्यमिता के अवसरों से जुड़ा है।

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