आदिवासियों का शोषण बंद करे सरकार, जल-जंगल-जमीन से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं : पूर्व विधायक चक्रधर सिंह सिदार
रायगढ़। लैलूंगा के पूर्व विधायक चक्रधर सिंह सिदार ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर आदिवासी हितों की अनदेखी और विकास के नाम पर पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के हित और उनके अधिकारों की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली सरकार के कार्यकाल में आदिवासी समाज अपने ही जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष करने को मजबूर है।
पूर्व विधायक ने कहा कि आदिवासी समाज की आजीविका और अस्तित्व का आधार जल, जंगल और जमीन है। इसके बावजूद वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याओं और अधिकारों को प्राथमिकता देने के बजाय सरकार उद्योगों और बड़े पूंजीगत हितों को प्राथमिकता देती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की मुखिया स्वयं आदिवासी समाज से आती हैं, ऐसे में आदिवासी क्षेत्रों की यह स्थिति और भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
वनांचल में विकास के दावे खोखले : सिदार
चक्रधर सिंह सिदार ने कहा कि रायगढ़ जिले के वनांचल क्षेत्रों में आज भी सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंता का विषय है। सड़कों की बदहाली के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और लोगों की जान जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार लगातार विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, तो फिर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में धरातल पर इसका असर क्यों दिखाई नहीं देता?
उन्होंने कहा कि रायगढ़ जिले के वित्त मंत्री ओपी चौधरी प्रदेश के विकास की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, लेकिन उनके अपने जिले के लैलूंगा, धरमजयगढ़ और खरसिया विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों को लेकर जनता के बीच सवाल उठ रहे हैं। सिदार ने आरोप लगाया कि इन क्षेत्रों में भाजपा विधायक नहीं होने के कारण सरकार का अपेक्षित ध्यान नहीं है।
भाजपा विधायक नहीं तो क्या जनता भी भाजपा की नहीं?
पूर्व विधायक ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार किसी एक दल के विधायकों के लिए नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की जनता के लिए होती है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि “किसी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का विधायक नहीं है तो क्या वहां रहने वाली जनता सरकार की जनता नहीं है?”
उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के मामले में राजनीतिक पक्षपात की भावना लोकतंत्र और जनता दोनों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि लैलूंगा, धरमजयगढ़ और खरसिया के विधायक अपने-अपने विधायक निधि से क्षेत्र की जरूरत के अनुसार कार्य करा रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार को भी इन क्षेत्रों की समस्याओं की जिम्मेदारी उठानी चाहिए।
पूंजीपतियों के सामने झुकने के बजाय आदिवासियों की आवाज सुने सरकार
सिदार ने आरोप लगाया कि सरकार गरीब, किसान और आदिवासी वर्ग की समस्याओं को सुनने के बजाय बड़े उद्योगों और पूंजीपतियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को उसके अधिकारों से वंचित कर विकास का मॉडल थोपना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने दिया जाएगा। यदि सरकार ने वनांचल के लोगों की समस्याओं पर तत्काल ध्यान नहीं दिया तो कांग्रेस और जनता मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध करेगी।
“ट्रिपल इंजन” पर भी साधा निशाना
पूर्व विधायक चक्रधर सिंह सिदार ने भाजपा के ट्रिपल इंजन सरकार के नारे पर भी तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनाव के समय जनता को तेज विकास का सपना दिखाया गया था, लेकिन अब जनता खुद तय कर रही है कि उसे विकास कितना दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार को नारों और प्रचार से बाहर निकलकर सड़क, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदिवासी अधिकार और ग्रामीण विकास जैसे वास्तविक मुद्दों पर जवाब देना चाहिए।
सिदार ने कहा कि जनता अब केवल भाषण नहीं, बल्कि धरातल पर काम चाहती है। सरकार को आदिवासियों और गरीबों की आवाज सुननी होगी तथा जल-जंगल-जमीन से जुड़े अधिकारों और समस्याओं पर स्पष्ट जवाब देना होगा।

