बिलासपुर : रामावैली में सर्किट हाउस निर्माण को लेकर विवाद, 239 रहवासियों ने जताया विरोध

बिलासपुर। बिलासपुर-रायपुर मुख्य मार्ग से लगे बोदरी तहसील के रामावैली क्षेत्र में प्रस्तावित सर्किट हाउस निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कॉलोनी के रहवासियों ने करीब 2.50 एकड़ भूमि पर 13 कमरों के सर्किट हाउस निर्माण को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जिस जमीन पर निर्माण प्रस्तावित है, उसकी स्थिति और उपयोग को लेकर राजस्व रिकॉर्ड तथा प्रशासनिक प्रक्रिया को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।

रामावैली में करीब 450 परिवार निवास करते हैं। रहवासियों का दावा है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर यहां मकान खरीदे हैं। ऐसे में कॉलोनी से लगे क्षेत्र में नए सरकारी निर्माण को लेकर सुरक्षा, निजता और भविष्य की सुविधाओं को लेकर उनकी चिंता बढ़ी है।

खसरा नंबर 10 को लेकर उठ रहे सवाल

रहवासियों के अनुसार विवादित भूमि खसरा नंबर 10 से संबंधित है। उनका कहना है कि यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय/कोटवारी भूमि के रूप में दर्ज होने की बात सामने आती रही है।

रहवासियों का मुख्य सवाल यह है कि यदि उक्त भूमि का उपयोग सर्किट हाउस निर्माण के लिए निर्धारित किया गया है, तो इसके लिए जारी प्रशासनिक आदेश और राजस्व अभिलेखों में की गई संबंधित प्रविष्टि क्या है।

उनका कहना है कि केवल जमीन के शासकीय होने से अलग, किसी विशेष सरकारी परियोजना के लिए उसके उपयोग की प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेज भी स्पष्ट होना चाहिए।

SDM ने बताया शासन भूमि के उपयोग का अधिकार

मामले को लेकर बिल्हा SDM आकांक्षा त्रिपाठी का कहना है कि कोटवारी व्यवस्था ग्राम पंचायत क्षेत्र से संबंधित है और संबंधित सेवा भूमि शासन की होती है। उनके अनुसार, यदि शासन उचित समझता है तो शासकीय भूमि का उपयोग सरकारी निर्माण के लिए किया जा सकता है।

SDM के इस पक्ष के बाद अब रहवासी भूमि के वर्तमान राजस्व दर्जे और प्रस्तावित निर्माण के लिए किए गए प्रशासनिक निर्णय से संबंधित दस्तावेज सामने लाने की मांग कर रहे हैं।

19,200 वर्गफीट भूमि के कथित आवंटन पर भी सवाल

रहवासियों ने इसी खसरा नंबर से जुड़ी करीब 19,200 वर्गफीट भूमि के कथित आवंटन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि राजस्व रिकॉर्ड की कैफियत में इसका उल्लेख है।

हालांकि, इस दावे की वास्तविक स्थिति संबंधित मूल राजस्व रिकॉर्ड, आवंटन आदेश और सक्षम अधिकारी द्वारा जारी दस्तावेजों से ही स्पष्ट हो सकती है। इसलिए आवंटन की प्रक्रिया और वर्तमान भूमि स्थिति की आधिकारिक जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

बैंक लोन के दावे की भी जांच की मांग

रहवासियों की ओर से यह दावा भी किया गया है कि संबंधित कोटवार ढेलाऊ दास ने इस भूमि को आधार बनाकर बैंक ऑफ इंडिया से ऋण लिया था। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि बैंक दस्तावेजों से होना आवश्यक है।

यदि ऐसा कोई ऋण रिकॉर्ड मौजूद है, तो उसमें भूमि की स्थिति और अधिकार का उल्लेख किस आधार पर किया गया था, यह भी जांच का विषय हो सकता है।

भूमि संबंधी प्रकरण लंबित होने का दावा

कॉलोनीवासियों का कहना है कि संबंधित भूमि से जुड़ा मामला अनुविभागीय अधिकारी के कार्यालय में लंबित है। इसी बीच क्षेत्र में सर्किट हाउस का निर्माण शुरू होने को लेकर उन्होंने सवाल उठाए हैं।

रहवासियों की मांग है कि भूमि विवाद और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े सभी पहलुओं को स्पष्ट किए जाने के बाद ही निर्माण की स्थिति पर अंतिम निर्णय लिया जाए।

239 रहवासियों ने सौंपा ज्ञापन

सर्किट हाउस निर्माण के विरोध में रामावैली के 239 रहवासियों के समर्थन वाला ज्ञापन पुलिस अधीक्षक और बिल्हा अनुविभागीय अधिकारी को सौंपे जाने की जानकारी है।

ज्ञापन में निर्माण कार्य रोकने और भूमि एवं संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की गई है। रहवासियों ने मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन और भूख हड़ताल की चेतावनी भी दी है।

RERA और T&CP से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग

रहवासियों ने कॉलोनी के निर्माण के दौरान RERA और नगर एवं ग्राम निवेश विभाग (T&CP) के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों की भी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि स्वीकृत लेआउट में आसपास की शासकीय भूमि और प्रस्तावित सरकारी निर्माण से संबंधित स्थिति क्या थी, यह भी स्पष्ट होना चाहिए।

इस संबंध में कॉलोनीवासियों की ओर से पूर्व में शिकायतें किए जाने का दावा किया गया है। शिकायतों पर हुई कार्रवाई और संबंधित विभागों की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अब इन सवालों के जवाब जरूरी

रामावैली विवाद में फिलहाल मुख्य सवाल खसरा नंबर 10 की वर्तमान राजस्व स्थिति, भूमि के उपयोग का आदेश, कथित आवंटन, लंबित राजस्व प्रकरण और सर्किट हाउस निर्माण की स्वीकृति से जुड़े हैं।

यदि संबंधित विभाग इन दस्तावेजों को सार्वजनिक कर स्पष्ट कर देता है कि भूमि का उपयोग किस आदेश और किस प्रक्रिया के तहत निर्धारित किया गया है, तो विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

वहीं रहवासियों का कहना है कि वे विकास कार्य के विरोध में नहीं हैं, लेकिन कॉलोनी की सुरक्षा, निजता और भविष्य की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण से जुड़े सभी पहलुओं को स्पष्ट किया जाना चाहिए।

फिलहाल इस मामले में प्रशासनिक दस्तावेज और संबंधित पक्षों का आधिकारिक विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।

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