कटनी का बड़ा जमीन घोटाला : एक ही जमीन 3 बार बेची, शासकीय पट्टे की जमीन भी हड़पने की कोशिश
कटनी (ढीमरखेड़ा/स्लीमनाबाद)। कटनी जिले में जमीन की धोखाधड़ी का संगठित खेल सामने आया है। DA NEWS PLUS की रिपोर्ट और थाना ढीमरखेड़ा को दी गई लिखित शिकायत के अनुसार ग्राम भेड़ा निवासी बालमुकुंद दुबे पिता मूरत लाल दुबे (उम्र 65 वर्ष) पर आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर आदिवासी और शासकीय पट्टे की जमीनों की बार-बार रजिस्ट्री कर शासन और आदिवासियों को धोखा दिया है।
पहला मामला – खसरा नंबर 13 (0.48 हेक्टेयर)
शिकायत के अनुसार ग्राम शहडार, पटवारी हल्का नंबर 29, उमरिया पान, तहसील ढीमरखेड़ा में स्थित भूमि खसरा नं. 13, रकबा 0.48 हेक्टेयर की पहली रजिस्ट्री 11 जनवरी 2013 को हुई थी। इस जमीन को पुजऊ उर्फ पुसऊ गोंड़ पिता सरमन सिंह निवासी दादरगांवा, कुंडम (जबलपुर) से बालमुकुंद दुबे ने एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर खरीदा था। ऋण पुस्तिका क्रमांक 836/016620 से इसका विक्रय हुआ था, जिसके गवाह संजू लाल बर्मन और प्रेम सिंह थे।
आरोप है कि इसी जमीन की दूसरी रजिस्ट्री 24 अक्टूबर 2019 को फिर से करा दी गई। इस बार विक्रेता वही पुसऊ गोंड़ बना, लेकिन जाति बदलकर ठाकुर से अनुसूचित जनजाति दिखाकर रजिस्ट्री की गई। क्रेता बने सुरेश कोल पिता मिठाई लाल कोल (अनुसूचित जनजाति), ग्राम टिकरिया, बहेरीबंद। इस रजिस्ट्री में बालमुकुंद दुबे स्वयं गवाह बना, जबकि वह जानता था कि उसने खुद 2013 में यह जमीन खरीद रखी है। गवाह दोनों रजिस्ट्री में संजू लाल बर्मन ही था।
शिकायत में कहा गया है कि इसी जमीन को 2025 में बालमुकुंद और सुरेश कोल ने मिलकर एक अन्य व्यक्ति जितेंद्र ठाकुर को फिर से रजिस्ट्री कर दिया।
दूसरा मामला – खसरा नंबर 14 (शासकीय पट्टे की अहस्तांतरणीय भूमि)
इसी से लगा हुआ खसरा नंबर 14 जो शासकीय पट्टेदार की जमीन है, उसे भी नहीं छोड़ा गया। श्याम सिंह नेम सिंह पिता चैन सिंह गोंड़ (जिन्हें शासन से पट्टा मिला था) से यह जमीन 12 फरवरी 2020 को (रजिस्ट्री नं. MP 208052020A1110751) सुरेश कोल, जो बालमुकुंद का ही संबंधित व्यक्ति बताया जा रहा है, के नाम करा ली गई। चूंकि यह अहस्तांतरणीय भूमि है, इसका नामांतरण रुक गया।
आरोप है कि इसके बाद षड्यंत्र रचकर इसी जमीन की रजिस्ट्री 31 दिसंबर 2025 को नेम सिंह से राधाबाई कोल पिता रामू कोल (भेड़ा निवासी, बालमुकुंद से संबंधित) के नाम करा दी गई। इसमें फोन नंबर खुद बालमुकुंद का दिया गया और गवाह अपने बेटे पार्थ दुबे को बनाया। श्याम सिंह की मृत्यु के बाद उसके पुत्र अनिल सिंह के नाम खसरा चढ़ा तो 29 जनवरी 2026 को अनिल सिंह से भी उसी जमीन की रजिस्ट्री राधाबाई के नाम करा दी गई। दोनों बार तहसीलदार ने नामांतरण यह कहकर खारिज कर दिया कि यह भूमि अहस्तांतरणीय है।
कोटवारी भूमि में भी धोखाधड़ी का आरोप
शिकायत में तीसरा आरोप कोटवारी भूमि का है। ग्राम नेगवां, हल्का नं. 35/97, स्लीमनाबाद, बहेरीबंद में स्थित पुराना खसरा 58, नया 105 जो कोटवार राम विशाल बांसोर को शासन से सेवा भूमि के रूप में मिली है, उस पर भी कटनी के कई लोगों से इकरारनामा कर लाखों रुपये लेने का आरोप है।
धमकी का भी आरोप
शिकायती पत्र में पीड़ित पक्ष ने यह भी लिखा है कि पैसे मांगने या शिकायत करने पर बालमुकुंद दुबे और उसका बेटा पार्थ दुबे जान से मारने और झूठे केस में फंसाने की धमकी देते हैं।
फिलहाल ये सभी आरोप शिकायत में लगाए गए हैं इनकी पुष्टि संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी ।

