CEC कानून पर सुप्रीम कोर्ट में नया मोड़, CJI सूर्यकांत बोले- जांच करेंगे और फैसला लेंगे
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2026। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया में बुधवार को नया मोड़ आया। CJI जस्टिस सूर्यकांत ने उस अर्जी पर विचार करने की बात कही है, जिसमें मामले को पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेजने वाले पिछले आदेश को वापस लेने की मांग की गई है।
CJI के सामने रखी गई रिकॉल अर्जी
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अर्जी का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की। इस पर CJI ने कहा कि अदालत मामले की जांच करेगी और उसके बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।
याचिका दायर करने वाले पक्ष की मांग है कि 23 सितंबर को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ द्वारा पारित उस आदेश को वापस लिया जाए, जिसके जरिए CEC और EC की नियुक्ति से जुड़े कानून की संवैधानिक चुनौती को पांच जजों की संविधान पीठ के समक्ष भेजने का रास्ता बना था।
23 सितंबर को आया था स्प्लिट वर्डिक्ट
23 सितंबर को दोनों न्यायाधीशों की राय इस सवाल पर अलग-अलग थी कि मामले को संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए या नहीं। जस्टिस दीपांकर दत्ता का मत था कि मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने की आवश्यकता नहीं है, जबकि जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने संविधान के महत्वपूर्ण सवालों का हवाला देते हुए पांच सदस्यीय पीठ के समक्ष सुनवाई का पक्ष लिया था।
दोनों की अलग राय के बाद मामले को आगे की प्रक्रिया के लिए CJI के समक्ष रखा गया।
जस्टिस शर्मा को लेकर क्या है आपत्ति?
रिकॉल अर्जी में जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के संभावित हितों के टकराव का मुद्दा भी उठाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जस्टिस शर्मा के बेटे चुनाव आयोग की ओर से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में वकील के तौर पर पेश होते हैं और इस तथ्य का सुनवाई के दौरान खुलासा नहीं किया गया था।
हालांकि, यह याचिकाकर्ता की ओर से उठाई गई आपत्ति है। सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस आरोप या रिकॉल की मांग पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।
CEC नियुक्ति कानून को लेकर विवाद
विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 से जुड़ा है। इस कानून के तहत CEC और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए चयन समिति की व्यवस्था की गई है। कानून की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
फिलहाल अदालत के सामने दो अहम सवाल हैं—पहला, रिकॉल अर्जी पर आगे सुनवाई की जाए या नहीं और दूसरा, CEC नियुक्ति कानून से जुड़े मामले को संविधान पीठ के पास भेजने की पिछली प्रक्रिया में क्या बदलाव किया जाना चाहिए।
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछला आदेश वापस ले लिया है। CJI सूर्यकांत ने फिलहाल सिर्फ अर्जी की जांच कर उचित निर्णय लेने की बात कही है।
