नेपाल में फिर बाढ़ का कहर: बूढ़ी गंडकी नदी में उफान, तीन पुल बहे; कई गांवों पर खतरा

काठमांडू। नेपाल में प्राकृतिक आपदा का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है। गोरखा जिले में बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ के कारण तीन पुल बह गए, कई घरों में पानी घुस गया और सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है। राहत और बचाव दल प्रभावित इलाकों में तैनात हैं।

भूस्खलन से नदी का रास्ता रुका, फिर आया तेज बहाव

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गोरखा जिले के चुमनुब्री क्षेत्र में पहाड़ से मिट्टी और चट्टानें गिरने के कारण नदी का प्रवाह बाधित हो गया था। इसके बाद अचानक पानी का तेज बहाव नीचे की ओर बढ़ा और आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। कई जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं और लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

तीन पुल बहे, कई घरों पर मंडराया खतरा

बाढ़ के पानी में अलग-अलग स्थानों पर तीन पुल बहने की खबर है। इनमें चुमनुब्री क्षेत्र में न्याकचेत और सिर्दिबास को जोड़ने वाला पुराना सस्पेंशन ब्रिज, धार्चे क्षेत्र में माछाखोला और केरौजा को जोड़ने वाला पुल तथा आरुघाट के वार्ड नंबर 2 और 3 के बीच स्थित सोती का लोहे का पुल शामिल हैं।

माछाखोला की निचली बस्ती में कई घरों में पानी घुस गया है, जबकि धार्चे क्षेत्र के सल्लेरी में लगभग 20 से 22 घरों पर खतरा बताया गया है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

लोगों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह

आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की है। लोगों को नदी के किनारे जाने से बचने तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। राहत एवं बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मदद और स्थिति का आकलन करने में जुटे हैं।

अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद फिर बढ़ी चिंता

नेपाल अभी अगस्त में आई विनाशकारी बाढ़ के प्रभावों से उबरने की कोशिश कर रहा है। उस आपदा में बड़े पैमाने पर जनहानि हुई थी और हजारों लोग लापता हुए थे। सड़कों, पुलों, घरों और जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा था। ऐसे में ताजा बाढ़ ने प्रभावित क्षेत्रों में एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।

फिलहाल, प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन करना है। स्थिति के अनुसार आगे राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

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