एनटीपीसी सीपत में सेनोस्फियर टेंडर से लेकर राखड़ परिवहन तक सवाल, क्या तबादला ही पर्याप्त कार्रवाई?

तत्कालीन एजीएम अनंत वासने पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप, सेनोस्फियर की बिक्री और संभावित राजस्व हानि की जांच की मांग; स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उठाया सीबीआई जांच का मुद्दा

अनिल शुक्ला की रिपोर्ट

बिलासपुर। एनटीपीसी सीपत में राखड़ परिवहन और सेनोस्फियर के संग्रहण एवं बिक्री को लेकर उठे सवाल अब गंभीर जांच की मांग तक पहुंच गए हैं। एक ओर राखड़ परिवहन में कथित वित्तीय अनियमितताओं, वाहनों के संदिग्ध नंबर, जीपीएस निगरानी और टोल प्लाजा से संबंधित शिकायतें सामने आई हैं, तो दूसरी ओर सेनोस्फियर जैसे मूल्यवान औद्योगिक पदार्थ की निविदा प्रक्रिया और उससे होने वाली आय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि इन मामलों में प्रभावी कार्रवाई के बजाय जिम्मेदार अधिकारियों के तबादले तक ही सीमित रहने से वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

इन शिकायतों के बीच तत्कालीन एजीएम अनंत वासने की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और किसी भी संभावित वित्तीय नुकसान की वास्तविक राशि का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।

सेनोस्फियर टेंडर: ₹1.04 करोड़ के आरक्षित मूल्य से आगे क्या हुआ?

एनटीपीसी सीपत के आधिकारिक टेंडर रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2015 में सेनोस्फियर के संग्रहण एवं बिक्री के लिए निविदा जारी की गई थी। टेंडर संख्या NTPC/Sale-Cenosphere/Sipat/CS/2015-16/15135 में ₹1.04 करोड़ का आरक्षित मूल्य दर्ज था। इसके बाद 16 मई 2016 को भी सेनोस्फियर संग्रहण एवं बिक्री से संबंधित एक अन्य निविदा का रिकॉर्ड मिलता है।

सेनोस्फियर फ्लाई ऐश में मौजूद हल्के, खोखले और गोलाकार कण होते हैं, जिनका उपयोग पेंट, प्लास्टिक, पॉलिमर, निर्माण सामग्री और विभिन्न औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। गुणवत्ता और बाजार की मांग के अनुसार इसका व्यावसायिक मूल्य हो सकता है।

ऐसे में सवाल है कि वर्ष 2016 के बाद इस पदार्थ के संग्रहण एवं बिक्री की प्रक्रिया किस प्रकार संचालित हुई? क्या नियमित रूप से निविदाएं जारी होती रहीं? क्या किसी अन्य व्यवस्था के तहत बिक्री की गई? यदि किसी अवधि में निविदा प्रक्रिया नहीं हुई, तो इसके पीछे क्या कारण था?

स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया जा रहा है कि सेनोस्फियर की निविदा प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से एनटीपीसी को संभावित राजस्व का नुकसान हुआ। इस मामले में तत्कालीन एजीएम अनंत वासने की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध टेंडर रिकॉर्ड से अपने आप यह साबित नहीं होता कि निविदा जानबूझकर रोकी गई थी या इसके लिए कोई एक अधिकारी जिम्मेदार था। इसकी पुष्टि के लिए संबंधित फाइलों, निर्णयों और वित्तीय अभिलेखों की जांच जरूरी है।

राखड़ परिवहन में कथित अनियमितताओं की शिकायतें

एनटीपीसी सीपत में राखड़ परिवहन को लेकर स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों ने कई गंभीर शिकायतें किए जाने का दावा किया है। शिकायतों में कथित फर्जी बिल्टी, वाहनों के नंबरों में विसंगतियां, अलग-अलग नंबरों के माध्यम से एक ही वाहन के उपयोग की आशंका, जीपीएस निगरानी में गड़बड़ी और टोल प्लाजा से संबंधित रिकॉर्ड की जांच जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यदि परिवहन संबंधी रिकॉर्ड, वास्तविक वाहन परिचालन और भुगतान विवरण का मिलान किया जाए, तो कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उनका कहना है कि परिवहन की दूरी, वाहन की पहचान, जीपीएस रिकॉर्ड, टोल प्लाजा से गुजरने का विवरण और भुगतान के दस्तावेजों का स्वतंत्र परीक्षण आवश्यक है।

इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अवधि के परिवहन रिकॉर्ड, वाहन पंजीयन विवरण, जीपीएस डेटा, टोल प्लाजा रिकॉर्ड, बिल्टी और भुगतान संबंधी दस्तावेजों का मिलान किया जाना चाहिए। यदि इनमें विसंगतियां मिलती हैं, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि वे तकनीकी या दस्तावेजी त्रुटियां थीं अथवा किसी वित्तीय अनियमितता से जुड़ी थीं।

अनंत वासने के तबादले के बाद भी जांच की मांग

राखड़ परिवहन और सेनोस्फियर से जुड़े मामलों में तत्कालीन एजीएम अनंत वासने का नाम सामने आने के बीच उनके बिहार स्थित एक अन्य एनटीपीसी संयंत्र में तबादले की चर्चा है। स्थानीय स्तर पर इसे शिकायतों के दबाव के बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, तबादले का आधिकारिक कारण और शिकायतों से उसका संबंध स्वतंत्र रूप से पुष्ट होना बाकी है।

कुछ स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि जिस संयंत्र में उनका तबादला हुआ है, उसकी क्षमता सीपत परियोजना से अधिक है। लेकिन केवल संयंत्र की क्षमता के आधार पर किसी तबादले को पदावनति या विभागीय दंड नहीं कहा जा सकता। इसके लिए संबंधित अधिकारी के नए पद, जिम्मेदारियों, वेतनमान और आधिकारिक आदेश का विवरण देखना जरूरी है।

सबसे अहम सवाल यह है कि यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो क्या केवल तबादला पर्याप्त कार्रवाई माना जा सकता है? स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

करोड़ों की संभावित राजस्व हानि का हिसाब जरूरी

सेनोस्फियर टेंडर में दर्ज ₹1.04 करोड़ का आरक्षित मूल्य और राखड़ परिवहन से संबंधित शिकायतें दो अलग-अलग विषय हैं, लेकिन दोनों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल महत्वपूर्ण है।

सेनोस्फियर के मामले में वास्तविक बिक्री, प्राप्त राशि, उपलब्ध मात्रा और वर्षवार निविदाओं का विवरण सामने आना चाहिए। वहीं, राखड़ परिवहन के मामले में वास्तविक परिवहन मात्रा, निर्धारित दूरी, भुगतान, वाहन परिचालन और संबंधित अनुबंधों का परीक्षण जरूरी है।

इन दोनों मामलों में संभावित राजस्व हानि का आकलन केवल आरोपों या पुराने टेंडर के आरक्षित मूल्य के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए वित्तीय रिकॉर्ड, अनुबंधों, भुगतान विवरण और वास्तविक परिचालन के दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।

यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी निर्णय, लापरवाही या अनियमितता के कारण एनटीपीसी को आर्थिक नुकसान हुआ, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका के आधार पर जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए।

सीबीआई जांच की मांग, प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल

स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि राखड़ परिवहन और सेनोस्फियर टेंडर से जुड़े मामलों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए। शिकायतकर्ताओं का तर्क है कि यदि आरोपों में बड़े वित्तीय नुकसान, फर्जी दस्तावेजों या संगठित अनियमितताओं के संकेत मिलते हैं, तो जांच का दायरा केवल विभागीय स्तर तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसी आधार पर सीबीआई जांच की मांग भी उठाई जा रही है।

हालांकि, सीबीआई जांच की आवश्यकता और उसका दायरा संबंधित तथ्यों, शिकायतों, उपलब्ध साक्ष्यों तथा सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के आधार पर तय होगा। फिलहाल आरोपों को सिद्ध तथ्य मानने के बजाय उनका दस्तावेजी परीक्षण किया जाना जरूरी है।

एनटीपीसी प्रबंधन को भी सेनोस्फियर की निविदाओं, वास्तविक बिक्री, राखड़ परिवहन की निगरानी और शिकायतों पर की गई कार्रवाई के संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इससे यह पता चल सकेगा कि शिकायतों पर क्या कदम उठाए गए, किसी आंतरिक जांच में क्या सामने आया और आगे की कार्रवाई की क्या योजना है।

अब सवालों के जवाब जरूरी

एनटीपीसी सीपत में सेनोस्फियर की बिक्री और राखड़ परिवहन से जुड़े मामलों में कई सवालों के जवाब अभी सामने आने बाकी हैं। वर्ष 2016 के बाद की निविदा प्रक्रिया, सेनोस्फियर से प्राप्त वास्तविक राजस्व, परिवहन संबंधी शिकायतों की जांच और तत्कालीन एजीएम अनंत वासने के तबादले का आधिकारिक कारण स्पष्ट होना चाहिए।

यदि शिकायतों में दम है, तो केवल प्रशासनिक स्थानांतरण से मामले का पटाक्षेप नहीं होना चाहिए। दस्तावेजों के आधार पर जांच, संभावित वित्तीय नुकसान का आकलन और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका तय करना जरूरी है। स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाए।

Back to top button