छत्तीसगढ़: राजस्व विभाग में रिश्वत के सबसे ज्यादा मामले, स्कूल शिक्षा विभाग दूसरे स्थान पर; एसीबी के आंकड़ों में खुलासा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के आंकड़ों में राजस्व विभाग सबसे आगे है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की वर्ष 2021 से 28 मई 2026 तक की कार्रवाई के अनुसार, राजस्व विभाग में रिश्वत लेते पकड़ने से जुड़े 56 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 67 शासकीय अधिकारी-कर्मचारी आरोपी बनाए गए। वहीं, स्कूल शिक्षा विभाग 20 मामलों और 25 आरोपियों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।

पांच साल में 154 मामले, 193 अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से मई 2026 तक प्रदेश में रिश्वतखोरी से जुड़े 154 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कुल 193 शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इस दौरान रिश्वत के रूप में दी गई कुल 51 लाख 67 हजार 540 रुपये की राशि जब्त की गई।

आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 में 13 मामलों में 14 अधिकारी-कर्मचारी गिरफ्तार किए गए। वर्ष 2022 में भी 13 मामले दर्ज हुए और 18 कर्मचारी गिरफ्तार किए गए। वर्ष 2023 में दर्ज मामलों की संख्या शून्य बताई गई। वर्ष 2024 में 44 मामलों में 57 अधिकारी-कर्मचारी गिरफ्तार किए गए, जबकि वर्ष 2025 में 60 मामलों में 71 कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई। वर्ष 2026 में 28 मई तक 24 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 33 अधिकारी-कर्मचारी गिरफ्तार किए गए।

राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा मामले

विभागवार आंकड़ों में राजस्व विभाग पहले स्थान पर है। यहां 56 मामलों में 67 शासकीय सेवकों को आरोपी बनाया गया। इनमें दो अनुविभागीय अधिकारी और एक तहसीलदार स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं।

स्कूल शिक्षा विभाग में 20 मामले दर्ज हुए, जिनमें 25 अधिकारी-कर्मचारी आरोपी बनाए गए। इनमें एक सहायक संचालक और एक जिला शिक्षा अधिकारी स्तर के अधिकारी शामिल हैं।

इसके बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में 14 मामलों में 15 आरोपी, जबकि गृह यानी पुलिस विभाग में 10 मामलों में 13 आरोपी दर्ज किए गए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में सात मामलों में 10 और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग में छह मामलों में आठ अधिकारी-कर्मचारी आरोपी बनाए गए।

सूरजपुर में सबसे ज्यादा मामले, रायगढ़ भी सूची में शामिल

जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, सूरजपुर में रिश्वतखोरी से जुड़े सबसे अधिक 16 मामले दर्ज किए गए। यहां 16 शासकीय सेवकों को आरोपी बनाया गया। सरगुजा में 12 मामलों में 20 अधिकारी-कर्मचारी आरोपी बनाए गए, जो जिलों में आरोपियों की सबसे अधिक संख्या है।

राजधानी रायपुर में 13 मामलों में 15 आरोपी दर्ज किए गए, जबकि रायगढ़ जिले में 11 मामलों में 12 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। मुंगेली, बिलासपुर, बलरामपुर, दुर्ग, जांजगीर-चांपा और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जैसे जिलों में छह से आठ के बीच मामले दर्ज किए गए।

निर्माण कार्यों के भुगतान के लिए रिश्वत के सबसे ज्यादा मामले

एसीबी के आंकड़ों में निर्माण कार्यों का भुगतान कराने के नाम पर रिश्वत मांगने के 14 मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा जमीन का सीमांकन, नामांतरण और राजस्व अभिलेख दुरुस्त कराने से जुड़े आठ-आठ मामले सामने आए।

मुआवजा राशि दिलाने, पेंशन और उपदान जारी कराने, निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन करने, बिजली कनेक्शन देने तथा जमीन की चौहद्दी निर्धारित करने जैसे कामों के लिए भी रिश्वत मांगने की शिकायतों पर कार्रवाई की गई।

पांच साल में पांच आरोपियों को ही सजा

आंकड़ों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पांच वर्षों के दौरान इन मामलों में केवल पांच लोगों को सजा होने की जानकारी दी गई है। इससे रिश्वतखोरी के मामलों में कार्रवाई के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया के परिणामों पर भी ध्यान देने की जरूरत सामने आती है।

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