रायगढ़ १४ जुलाई। जिले के रायगढ़ तहसील आरआई सर्किल रायगढ़ के दायरे में आने वाले नटवरपुर गांव में इन दिनों क्या चल रहा है? नटवरपुर गांव में इन दिनों काफी कुछ चल रहा है। गांव की जमीन के सौंदे काफी बड़े पैमाने पर किये जा रहे हैं। जमीन के दलाल नटवरपुर गांव के खातेदारों के घर-घर जाकर उन्हें उनकी जमीन के लिये ऑफर दे रहे हैं। जमीन दलालों का एक बड़ा समूह इन दिनों इसी काम में लगा हुआ है।
नटवरपुर जैसे नाम से ही यह पता चलता है कि यह रायगढ़ रियासत के पूर्व राजा भूपदेव सिंह द्वारा अपने पुत्र नटवर सिंह के नाम पर बसाया गया एक गांव है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक राजा भूपदेव सिंह की मृत्यु के बाद उनके पुत्र राजा चक्रधर सिंह ने अपने शासनकाल में नटवरपुर गांव जिसका एक नाम कुमीबहाल भी है को अपने एक दीवान को दान में दे दिया था। बाद में दीवान के उत्तराधिकारियों ने नटवरपुर की बहुत सारी जमीन बेच दी। यहां यह बताना होगा कि नटवरपुर आज तक एक अनसर्वेड विलेज है। याने इस गांव आज तक सर्वे हुआ ही नहीं। गांव का नक्शा भी नहीं है। गांव में जमीन का कुल कितना रकबा है इस बात की भी जानकारी नहीं है। अभी कुछ साल पहले यहीं के कुछ आदिवासियों की जमीन उन्हें गैर आदिवासी बताकर बयनामा रजिस्ट्री करा लिया गया था। बाद में जब यह मामला उजागर हुआ तो सभी बयनामा रद्द कर दिये गये और पूरे मामले की जाँच के आदेश दिये गये थे। जाँच शुरू हुई भी यह नहीं इसकी कोई जानकारी नहीं है।
अब सवाल यह पैदा होता है कि जब किसी गांव का नक्शा ही नहीं है तो वहां की जमीन किस आधार पर खरीदी-बेची जा रही है। यह पूरा मामला अपने पीछे जमीन हथियाने के किसी बड़े खेल को छिपाये हुए है। बताया जाता है कि मुम्बई की एक कंपनी किसी खास मकसद से नटवरपुर की पूरी जमीन खरीदना चाहती है। अभी तक वह जमीन का एक बड़ा रकबा खरीद भी चुकी है। कंपनी का एक प्रमुख दलाल जमीन का काम करने वाले छोटे दलालों के माध्यम से नटवरपुर की जमीनों के सौंदे कर रहे हैं। स्थानीय राजस्व अमला भी इस मामले में उनका पूरा सहयोग कर रहा है। कुल जमा यह एक गंभीर मामला है जिसकी उच्चस्तरीय जाँच की जानी चाहिए और उससे पहले नटवरपुर में जमीन की खरीद-बिक्री पर सख्त पाबंदी लगानी चाहिए।



