सुशासन की मिसाल : रायगढ़ में 5027 वनांचल बच्चों को बिना नए बजट के मिले गर्म स्वेटर

117 छात्रावासों में 5027 बच्चों को मिला स्वेटर

ठंड में मिली राहत, बच्चों के चेहरों पर लौटी मुस्कान

सरकारी बचत बनी आदिवासी बच्चों की ढाल

रायगढ़, 18 जनवरी 2026 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन और अंत्योदय की सोच को जमीन पर उतारते हुए रायगढ़ जिला प्रशासन ने एक संवेदनशील और अनुकरणीय पहल की है। सुदूर वनांचल क्षेत्रों में संचालित आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रावासों और आश्रमों में अध्ययनरत बच्चों को कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए किसी नए बजट का इंतजार नहीं किया गया, बल्कि उपलब्ध संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से 5027 बच्चों को गर्म स्वेटर उपलब्ध कराए गए। यह पहल बताती है कि जब नीति में मानवता और नीयत में सेवा हो, तो छोटे फैसले भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।

जिले में पड़ रही कड़ाके की ठंड को देखते हुए कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने निर्देश दिए कि प्री-मैट्रिक छात्रावासों में शिष्यावृत्ति राशि से बची हुई रकम का उपयोग बच्चों की तत्काल आवश्यकताओं के लिए किया जाए। इस बचत राशि का उपयोग ठंड से बचाव हेतु स्वेटर वितरण में करने का निर्णय लिया गया, जो प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

कलेक्टर की इस पहल के तहत जिले के 117 आदिवासी छात्रावासों एवं आश्रमों में रहने वाले 5027 बच्चों को गर्म एवं गुणवत्तापूर्ण स्वेटर वितरित किए गए। यह पहल केवल कपड़ों के वितरण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके माध्यम से बच्चों को यह विश्वास दिलाया गया कि शासन और प्रशासन उनकी चिंता करता है। ठंड से राहत मिलने के बाद बच्चों की उपस्थिति में वृद्धि हुई है और उनकी पढ़ाई पहले की तुलना में अधिक नियमित हुई है। स्वेटर पाकर बच्चों के चेहरों पर मुस्कान खिल उठी। सभी बच्चों ने इस संवेदनशील पहल के लिए शासन और प्रशासन का हृदय से धन्यवाद किया।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा परिकल्पित अंत्योदय और सुशासन की अवधारणा का यह पहल जीवंत उदाहरण है। बिना अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाले, उपलब्ध संसाधनों का सही प्रबंधन कर बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया गया। आज रायगढ़ के छात्रावासों व आश्रमों में बच्चों के कंधों पर ठंड का बोझ नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदना की गर्माहट है। यह पहल साबित करती है कि सुशासन का असली अर्थ इमारतों में नहीं, बल्कि बच्चों की मुस्कान में दिखाई देता है।

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