
अभी और बदलेगी जिला भाजपा की तस्वीर
प्रदेश संगठन में हुए फेरबदल का जिला भाजपा में पड़ेगा व्यापक प्रभाव,
इन लोगो मे से किसी एक के कंधे पर हो सकता है भाजपा जिला अध्यक्ष का ताज,
कार्य करने वाले कार्यकर्ता होंगे पुरुष्कृत, मिलेगी अहम जवाबदारी






रायगढ-भाजपा को प्रारंभ से ही कार्यकर्ताओं की पार्टी माना जाता है जहाँ कार्यकर्ता पार्टी की रीण मानी जाती है वहीं संगठन आधारित नीतियों के कारण यह पार्टी आज विश्व की सबसे बड़ी राजनैतिक दल के रूप जानी जाती है।लगातार पंद्रह वर्षों से सरकार में रहने के कारण इस पार्टी में सत्ता एवं संगठन के बीच बड़ी खाई बन गई थी जिसकी परिणीति कांग्रेस की बंफर जीत के रूप में सामने आई।इतिहास गवाह है जब जब संगठन पर सत्ता हावी हुई है तब तब राजनैतिक पार्टी का हश्र यही हुआ है।सरकार जाने के बाद एक वर्ष तो भाजपा मृतप्राय रही उसके बाद कोरोनो महामारी ने सभी प्रकार की गतिविधियों पे अंकुश लगा दिया,यही कारण रहा होगा जिसके कारण प्रदेश में विपक्ष की धार कमजोर हो चली।भाजपा को विपक्ष की राजनीति में महारथ हासिल है पर यह धार प्रदेश में कहीं देखने को नहीं मिल रहा था,प्रायोजित विरोध प्रदर्शन एवं परंपरागत प्रेस कांफ्रेंस की वजह से पार्टी जनता विश्वास खोती जा रही थी।राष्ट्रीय नेतृत्व ने भी प्रदेश भाजपा के क्रियाकलापों पर संज्ञान लेना लगभग बंद ही कर दिया जिसकी वजह से प्रदेश के प्रथम पंक्ति के नेता भूपेश के खास बने बैठे थे।अपने नेताओं को मूकदर्शक बने देखने के कारण नीचे के कार्यकर्ताओं में भी ऊर्जा की कमी आ गई थी जिसकी वजह से पहले निगम चुनाव फिर पंचायत चुनाव में भाजपा की दुर्गति पूरे प्रदेश में हुई।रायगढ जिले की बात करें तो यहाँ एक भी विधायक भाजपा का नहीं है ,पार्टी ने युवा जिलाध्यक्ष के रूप में उमेश अग्रवाल की ताजपोशी की ताकि यहां विपक्ष को एक किया जा सके।उमेश अग्रवाल के अब तक के कार्यकाल की यदि समीक्षा की जाए तो बहुत हद तक कई धड़ों में बंटे भाजपा कार्यकर्ताओं को एक करने में उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया,जिला भजपा के गठन से लेकर, सारी गतिविधियों में उन्होंने निःस्वार्थ योग्य कार्यकर्ताओं को जवाबदारी सौंपा,धरातल में भाजपा मजबूत हो ही रही थी की एक आरोप ने उनके राजनैतिक साख पर बट्टा लगा दिया।व्यसायिक होने के कारण समय समय पर उनके ऊपर सत्ता का ख़ौफ़ भी शहर वासियों ने महसूस किया।जिला भाजपा के संचालन में प्रदेश भाजपा के नेता ओपी चौधरी के प्रत्यक्ष हस्तक्षेप को भी न्धी नकारा जा सकता ।गृह जिला होने के कारण यहाँ होने वाले हर कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति एवं उनके निर्देशों की महत्ता जग जाहिर है।राजनैतिक जानकारों का तो यहाँ तक कहना है कि उमेश अग्रवाल ने अब तक ओपी चौधरी के मजबूत कंधों का बड़ी ही चतुराई से उपयोग किया है।इस कारण जिलाध्यक्ष के रूप में उनकी स्वीकार्यता अपेक्षाकृत कम ही मानी जा सकती है।अगले वर्ष प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने है।कांग्रेस मुक्त भारत की परिकल्पना को सार्थक करने में भाजपा को यहां सरकार बनाना नितांत आवश्यक है ऐसे में अब केंद्रीय संगठन ने प्रदेश भाजपा में बड़े बड़े बदलाव करने प्रारम्भ कर दिए है।नेता प्रतिपक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश संगठन प्रभारी,कई मोर्चों के अध्यक्ष ऐसे कई बड़े बदलाव अभी हालफिलहाल में हुए है।सूत्रों के हवालों से यह खबर छनकर आ रही है कि प्रदेश में हुए बदलाव का असर जिला भाजपा पर भी दिखेगा,आने वाले समय में भारी बदलाव संभव है




