NR इस्पात के खिलाफ शिकायतों का अंबार, जमीन रजिस्ट्री में भारी गड़बड़ी के आरोप, सैकड़ों पेड़ों की जानकारी छिपाने का मामला दर्ज

तमनार विकासखंड के दलारी गांव में स्थापित NR इस्पात एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। कंपनी के खिलाफ शिकायतों की श्रृंखला थमने का नाम नहीं ले रही। पहले छत्तीसगढ़ विधानसभा में भाजपा विधायक पुरंदर मिश्र द्वारा सवाल उठाया गया, इसके बाद वन विभाग द्वारा POR दर्ज किया गया और अब जमीन रजिस्ट्री में भारी गड़बड़ी को लेकर पंजीयन विभाग में बाकायदा मामला पंजीबद्ध हो चुका है।

मामला गेरवानी क्षेत्र के शिवपुरी गांव की जमीन से जुड़ा है, जहां शिकायतकर्ता सत्यदेव शर्मा ने आरोप लगाया है कि रजिस्ट्री दस्तावेज़ों में जमीन पर मौजूद सैकड़ों पेड़ों की जानकारी जानबूझकर छिपाई गई है। शिकायत के अनुसार, रजिस्ट्री में जितने पेड़ दर्शाए गए हैं, वास्तविक संख्या उससे 700 से अधिक है। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरणीय अपराध की श्रेणी में भी आता है।

शिकायत में यह भी बड़ा सवाल उठाया गया है कि जमीन का वास्तविक रकबा और रजिस्ट्री में दर्ज रकबा समान है या नहीं? यही सवाल विधानसभा में भी उठाया गया था। हालांकि, वहां से पंजीयन कार्यालय की ओर से सिर्फ इतना कहा गया कि “मामला पंजीबद्ध है और प्रक्रिया जारी है।”

लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ ‘प्रक्रिया जारी है’ कह देना पर्याप्त है?

पूरा मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि जब आरोपी एक बड़ा उद्योगपति हो, तो कानून की प्रक्रिया कितनी “लचीली” हो जाती है। जांच, समिति, प्रक्रिया—सब कुछ चलता रहता है, लेकिन ठोस कार्रवाई कहीं दिखाई नहीं देती। वहीं दूसरी ओर, जब मामला किसी आम नागरिक का होता है, तो प्रशासन देर नहीं करता—बुलडोजर, नोटिस और सख्ती तुरंत नजर आने लगती है।

इस पूरे मामले पर जिला पंजीयक मंडावी ने खबर उजागर से चर्चा में पुष्टि की है कि शिकायत को विधिवत पंजीबद्ध कर लिया गया है। जांच के लिए टीम गठित की गई है और जल्द ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

अब देखने वाली बात यह होगी कि यह जांच भी फाइलों में दबकर रह जाती है या फिर वास्तव में नियम, कानून और पर्यावरण के संरक्षण के लिए कोई ठोस कार्रवाई सामने आती है।

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