
रायगढ़ जिले के घरघोड़ा जनपद पंचायत में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्रस्तुत आवेदन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आवेदक प्रताप नारायण बेहरा ने वर्ष 2023-24 और 2024-25 के लिए आवास शाखा के कार्यालयीन व्यय और वास्तविक खर्च का विवरण मांगा था।
आरोप और विवाद
- मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CMO) द्वारा प्रदान की गई जानकारी अपूर्ण और भ्रामक बताई जा रही है।
- सूचना देरी से उपलब्ध कराई गई और इसके लिए आवेदक से सूचना शुल्क वसूला गया, जो RTI अधिनियम की भावना के खिलाफ है।
- आवेदन दिनांक 09/01/2026 को प्रस्तुत किया गया था, लेकिन अधिकारी ने पत्र 03/02/2026 को जारी किया और 09/02/2026 को पोस्ट दिखाया।
- जानकारी में यह कहा गया कि दो वित्तीय वर्षों के लिए अलग आवेदन करना आवश्यक है, बावजूद इसके आवेदक ने शुल्क देकर केवल एक वर्ष की ही जानकारी प्राप्त की।
कानून क्या कहता है?
- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुसार, आवेदन करने के 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
- निर्धारित समय सीमा के बाद सूचना देने पर इसे निशुल्क उपलब्ध कराना चाहिए।
- विलंब के बावजूद शुल्क वसूली अधिनियम का उल्लंघन मानी जा सकती है।
उठ रहे सवाल
- आवास शाखा में वास्तव में कितना बजट स्वीकृत हुआ था?
- वास्तविक खर्च कितनी राशि का हुआ?
- अधूरी और भ्रामक जानकारी क्यों दी गई?
- क्या दस्तावेजों में गड़बड़ी या बड़े भ्रष्टाचार को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है?
- कार्यालयीन व्यय के अंतर्गत स्टेशनरी, यात्रा, मरम्मत और संचालन आदि का सटीक लेखा-जोखा क्यों नहीं दिखाया गया?
आगे का रास्ता
- यदि संतोषजनक जानकारी उपलब्ध नहीं होती है, तो आवेदक प्रथम अपील और आवश्यकता पड़ने पर राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील कर सकते हैं।
- यह कदम न केवल पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा बल्कि जवाबदेही तय करने में मदद करेगा।
जनता और आवेदक दोनों यह जानने के इच्छुक हैं कि आवास शाखा के नाम पर खर्च हुई राशि का सच क्या है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी घरघोड़ा के सामने चुनौती यह है कि क्या वे संपूर्ण और पारदर्शी जानकारी देंगे या मामला और गहराएगा।




