
रायपुर में तेलीबांधा यातायात थाना प्रभारी विशाल कुजूर ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए उन दो युवकों की मदद की, जो गोवा से नागपुर तक ट्रेन के बाथरूम में छुपकर पहुंचे और वहां से पांच दिन पैदल चलकर रायपुर पहुंचे थे। दोनों युवक—प्रदीप और संतोष—ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के एक अंदरूनी गांव के रहने वाले हैं।
दो दिन पहले ड्यूटी के दौरान एक आरक्षक ने थानेदार कुजूर को बताया कि दो युवक नागपुर से पैदल आए हैं और झारसुगुड़ा जाने का रास्ता पूछ रहे हैं। शक होने पर जब टीआई विशाल कुजूर ने उनसे बातचीत की, तो उनकी कहानी सुनकर वे भी भावुक हो उठे।
गोवा में मजदूरी भी नहीं मिली, उल्टा पीटा गया
युवकों ने बताया कि एक एजेंट उन्हें मछली पकड़ने का काम दिलाने के बहाने गोवा ले गया था। तीन महीने तक कड़ी मेहनत कराने के बाद भी मजदूरी नहीं दी गई। जब विरोध किया तो पानी जहाज के मालिक ने मारपीट कर दोनों को भगा दिया। डर के कारण वे स्थानीय पुलिस के पास भी नहीं गए। उनके मोबाइल, आधार और सभी दस्तावेज वहीं जब्त कर लिए गए।
“सर… रेलवे ट्रैक के किनारे गिरा खाना उठाकर खा रहे थे”
बिना पैसे, बिना पहचान पत्र के दोनों नागपुर तक किसी तरह ट्रेन के बाथरूम में छुपकर पहुंचे। नागपुर से झारसुगुड़ा और फिर अपने गांव पहुंचने की कोशिश में वे पैदल ही चल पड़े। भूख से तड़पते हुए कभी रेलवे ट्रैक के पास गिरा खाना उठाकर खाया और कभी भूखे ही चलते रहे।
TI कुजूर ने भोजन, आर्थिक मदद और टिकट की व्यवस्था की
स्थिति समझते ही टीआई विशाल कुजूर ने दोनों को तुरंत भोजन कराया, आर्थिक सहायता दी और झारसुगुड़ा तक का टिकट खरीदकर उन्हें स्वयं ट्रेन में बैठाया। साथ ही अपना मोबाइल नंबर देकर कहा—
“घर safely पहुंचकर कॉल करना, और सरपंच की मदद से एजेंट व मालिक पर स्थानीय थाने में शिकायत जरूर करना।”
टीआई कुजूर ने अपील भी की—
“कोई पैदल चलता मिले तो पूछिए, मदद कीजिए। पता नहीं वह किस हाल में चल रहा होगा।”
संयोग भी दिल को छू लेने वाला था—यह पूरी घटना 22 नवंबर को घटी, वही तारीख जिस दिन वर्ष 2017 में उनकी पहली पोस्टिंग कुनकुरी थाने में हुई थी। कोरोना काल के वे दृश्य याद आ गए, जब समाज ने एक-दूसरे की मदद के लिए हाथ बढ़ाए थे।



