
बिलासपुर में मूर्तियों पर धूल का अंबार: हाईकोर्ट सख्त, नगर निगम आयुक्त से शपथपत्र तलब
बिलासपुर की सड़कों पर स्थापित महापुरुषों और छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमाएं उपेक्षा की शिकार, हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में चौक-चौराहों पर स्थापित महापुरुषों एवं छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमाओं पर जमी धूल और उपेक्षा का मामला अब न्यायालय की गंभीर नजर में आ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई तस्वीरों को संज्ञान में लेते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाया है।
हाईकोर्ट ने नगर निगम से मांगा जवाब, आयुक्त को शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश
मामले को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे विस्तृत शपथपत्र के माध्यम से सफाई व्यवस्था पर जवाब प्रस्तुत करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित प्रतिमाओं की नियमित देखरेख और स्वच्छता सुनिश्चित करना नगर प्रशासन की जिम्मेदारी है।
मीडिया रिपोर्ट्स से खुलासा: प्रतिमाओं की नियमित सफाई में गंभीर लापरवाही
स्थानीय मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों में यह सामने आया था कि शहर की प्रमुख प्रतिमाओं की नियमित सफाई नहीं हो रही है। कई स्थानों पर प्रतिमाएं धूल से ढकी हुई हैं और रात के समय पर्याप्त रोशनी न होने से स्थिति और खराब हो जाती है। विशेष अवसरों पर औपचारिक सफाई कर बाद में व्यवस्था को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
ठेका व्यवस्था पर भी सवाल, सफाई एजेंसी की लापरवाही उजागर
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार प्रतिमाओं की सफाई का कार्य लायन सर्विसेस कंपनी को सौंपा गया है, लेकिन कंपनी द्वारा नियमित रूप से कार्य नहीं किया जा रहा है। सफाईकर्मियों का कार्य मुख्य रूप से सड़कों तक सीमित रहने से प्रतिमाओं, डिवाइडरों और फुटपाथों की सफाई प्रभावित हो रही है।
नगर निगम ने दी सफाई, फिर भी कोर्ट असंतुष्ट, नई व्यवस्था के आदेश
नगर निगम की ओर से बताया गया कि शहर में समय-समय पर सफाई अभियान चलाए जाते हैं और जोन स्तर पर रोस्टर व्यवस्था भी लागू की गई है। बावजूद इसके कोर्ट ने इन दलीलों को अपर्याप्त मानते हुए आयुक्त को विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अगली सुनवाई 9 अप्रैल को, सफाई व्यवस्था पर हाईकोर्ट की नजर बरकरार
मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को निर्धारित की गई है, जहां नगर निगम की सफाई व्यवस्था और प्रतिमाओं की देखरेख को लेकर अदालत में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। अब पूरे शहर की निगाहें इस न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं।
