RTI पर भारी ‘लालफीताशाही’: जशपुर में जानकारी देने के बजाय बहाने बना रहे जिम्मेदार, DEO ने लगाई कड़ी फटकार…

जशपुर। सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI) की धज्जियां उड़ाते हुए पत्थलगांव का एक सरकारी विद्यालय अब राज्य सूचना आयोग के निशाने पर आ सकता है। इंदिरा गांधी शासकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य द्वारा जानकारी देने के बदले 29 दिन का ‘अतिरिक्त समय’ मांगने की अजीबोगरीब मांग पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने कड़ा रुख अपनाया है। DEO ने स्पष्ट किया है कि RTI में अतिरिक्त समय का कोई प्रावधान नहीं है और देरी होने पर 250 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना प्राचार्य को अपनी जेब से भरना होगा।

​क्या है पूरा मामला? –​पत्रकार ने 1 जनवरी 2018 से अब तक विद्यालय को प्राप्त शासन, विकास निधि और जनभागीदारी निधि का वर्षवार ब्यौरा मांगा था। इसमें 5,000 रुपये से अधिक की खरीदी के कोटेशन, स्टॉक पंजी, कैश बुक और ऑडिट रिपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल थीं।

​बहानों की फेहरिस्त: प्राचार्य की मांग और DEO का जवाब –​विद्यालय के प्राचार्य ने पत्राचार के माध्यम से यह तर्क दिया कि जानकारी 2018 से मांगी गई है, इसलिए रिकॉर्ड के मिलान और परीक्षण के लिए 29 दिन का अतिरिक्त समय चाहिए। साथ ही यह भी दावा किया कि उन्हें आवेदन की प्रति ही प्राप्त नहीं हुई है।

​इस पर पलटवार करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की जनसूचना अधिकारी श्रीमती सरोज खलखो ने कड़े शब्दों में पत्र जारी किया है। DEO कार्यालय ने साफ कहा कि:

  • ​धारा 6(3)(II) के तहत आवेदन हस्तांतरण के बाद पूरी जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय की होती है।
  • ​RTI कानून में 30 दिन के बाद किसी भी ‘अतिरिक्त समय’ का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है।
  • ​जानकारी में देरी होने पर राज्य सूचना आयोग के समक्ष जवाबदारी प्राचार्य की होगी और विलंब शुल्क भी उन्हें ही देना होगा।

​प्रथम अपील: ‘सूचना को दुर्भावनापूर्ण तरीके से रोकना’​आवेदक ने अब इस मामले में प्रथम अपील दायर कर दी है। अपील में आरोप लगाया गया है कि जन सूचना अधिकारी धारा 7(1) की समय-सीमा का उल्लंघन कर रहे हैं और रिकॉर्ड अन्यत्र होने का बहाना बनाकर सूचना को दुर्भावनापूर्ण तरीके से रोका जा रहा है। आवेदक ने मांग की है कि पीआईओ (PIO) को तत्काल ‘सत्यनिष्ठ एवं पूर्ण जानकारी’ निःशुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएं।

​मुख्य बिंदु जो मामले को गंभीर बनाते हैं:

  • ​निधि का हिसाब: 2018 से अब तक की जनभागीदारी और शासन से प्राप्त राशि का विवरण देने में आनाकानी।
  • ​नियमों की अनदेखी: RTI कानून के विपरीत 29 दिन के एक्स्ट्रा टाइम की मांग।
  • ​आर्थिक दंड का खतरा: लापरवाही जारी रही तो जिम्मेदार अधिकारी पर प्रतिदिन 250 रुपये का जुर्माना लगेगा।

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