पश्चिम एशिया तनाव का असर: कच्चे तेल में उछाल से छत्तीसगढ़ में सड़क निर्माण कार्य ठप होने की आशंका, 10,000 करोड़ की परियोजनाएं संकट में

पश्चिम एशिया संकट से वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल, छत्तीसगढ़ के विकास कार्यों पर भारी असर

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में तेज उछाल दर्ज किया जा रहा है। इसका सीधा प्रभाव अब भारत के राज्यों, विशेषकर छत्तीसगढ़ में चल रहे सड़क निर्माण और आधारभूत ढांचा परियोजनाओं पर देखने को मिल रहा है। बढ़ती लागत ने विकास कार्यों की रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


10,000 करोड़ की सड़क परियोजनाएं संकट में, PWD और NHAI के काम पर ब्रेक लगने की स्थिति

प्रदेश के विभिन्न जिलों में लोक निर्माण विभाग (PWD), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की लगभग 10,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। कई ठेकेदारों ने बढ़ती लागत के कारण काम रोकने की चेतावनी देते हुए सरकार को पत्र भी सौंपा है।


डामर और इमल्शन के दामों में भारी बढ़ोतरी, 40% तक बढ़ी निर्माण लागत

सूत्रों के अनुसार डामर (Bitumen) की कीमतें जो पहले लगभग 40,000 रुपये प्रति टन थीं, अब बढ़कर 55,000 से 65,000 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई हैं। इमल्शन और लाइट डीजल ऑयल (LDO) के दामों में भी 30 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे सड़क निर्माण की कुल लागत पर भारी दबाव पड़ा है।


डीजल संकट से मशीनें ठप, निर्माण स्थलों पर काम रुकने की स्थिति

निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली भारी मशीनों को डीजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। कई साइटों पर आपूर्ति बाधित होने के कारण काम पूरी तरह रुक गया है। इससे न केवल परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं बल्कि मजदूरों और ठेकेदारों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ गया है।


ठेकेदारों का दावा: पुरानी दरों पर काम करना असंभव, भारी नुकसान की स्थिति

ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने टेंडर पुराने रेट के आधार पर भरे थे, लेकिन अब अचानक बढ़ी लागत के कारण काम करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। उनका कहना है कि वर्तमान बाजार दरों के अनुसार परियोजनाओं का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है।


छत्तीसगढ़ ठेकेदार संघ की मांग: लागत पुनरीक्षण और आर्थिक राहत जरूरी

छत्तीसगढ़ ठेकेदार संघ ने सरकार से मांग की है कि सभी परियोजनाओं की लागत का वर्तमान बाजार दरों के आधार पर पुनर्मूल्यांकन किया जाए। संघ का कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो पूरे प्रदेश में डामरीकरण और सड़क निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो सकते हैं।


राज्यभर में 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ी लागत, कई संभागों में काम बंद

रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, बस्तर और सरगुजा संभागों में सड़क निर्माण लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके चलते कई ठेकेदारों ने कार्य रोक दिया है, जिससे अधूरी परियोजनाएं खतरे में आ गई हैं।


बिल्डर्स एसोसिएशन की चेतावनी: समय रहते राहत नहीं मिली तो विकास कार्य होंगे प्रभावित

बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार को तत्काल आर्थिक राहत और दरों के पुनरीक्षण की आवश्यकता है। संगठन ने इस संबंध में सरकार को ज्ञापन भी सौंपा है।

 

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