JPSC भर्ती जांच में अभय तिवारी पर गंभीर आरोप, कई परीक्षाओं में गड़बड़ी के शक में सिंडिकेट की पड़ताल
रांची, 13 अगस्त। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, अभय कुमार तिवारी से जुड़े नेटवर्क को लेकर भी कई जानकारियां सामने आ रही हैं। जांच एजेंसियों के सामने ऐसे आरोप हैं कि यह नेटवर्क केवल झारखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि दूसरे राज्यों में आयोजित भर्ती परीक्षाओं से भी इसके तार जुड़े हो सकते हैं।
अभय तिवारी का नाम JPSC और JSSC की कई परीक्षाओं में सामने आया है। उपलब्ध जांच संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, वह पहले TDPL कंपनी में कार्यरत था। आरोप है कि कंपनी से जुड़े लोगों के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया में कथित हेरफेर कर अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने का नेटवर्क चलाया जाता था।
कई भर्ती परीक्षाओं में सफलता ने बढ़ाया संदेह
जांच के दौरान अभय तिवारी की अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार उसका नाम PGT, JSSC CGL, ACF, MRO और FSO जैसी परीक्षाओं से जुड़ा है। इन लगातार सफलताओं को लेकर शिकायतें मिलने के बाद जांच एजेंसियों ने उसके कथित नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल शुरू की।
जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि कुछ परीक्षाओं में OMR शीट से संबंधित कथित छेड़छाड़ की गई। एक शिकायत में JPSC की FRO और ACF प्रारंभिक परीक्षाओं की सैकड़ों OMR शीट में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था।
पैसे लेकर नौकरी दिलाने के आरोप
मीडिया रिपोर्टों में जांच से जुड़े आरोपों के हवाले से दावा किया गया है कि कथित सिंडिकेट अभ्यर्थियों से संपर्क कर सरकारी नौकरी में चयन कराने का भरोसा देता था। कुछ रिपोर्टों में अलग-अलग पदों के लिए लाखों रुपये की कथित लेनदेन की बात भी सामने आई है। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और पैसों का लेनदेन किन लोगों के बीच हुआ। पूछताछ के दौरान अभय तिवारी समेत अन्य आरोपियों से परीक्षा प्रक्रिया और कथित नेटवर्क को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है।
नेटवर्क की पहुंच की जांच जारी
पूरे मामले में अब जांच का दायरा केवल एक परीक्षा या एक भर्ती तक सीमित नहीं रहने की बात सामने आ रही है। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित नेटवर्क ने किन-किन परीक्षाओं को प्रभावित किया और इसमें झारखंड के बाहर के लोगों या संस्थाओं की क्या भूमिका थी।
फिलहाल मामले में सामने आए आरोप जांच के अधीन हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित सिंडिकेट का नेटवर्क कितने राज्यों और कितनी भर्ती परीक्षाओं तक फैला था।







