आबादी भूमि पर कब्जा अब बनेगा हक: पीएम आवास शहरी 2.0 में शामिल होंगे पात्र हितग्राही

छत्तीसगढ़ में आबादी भूमि पर मकान बनाकर रह रहे लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। ऐसे सभी लोग जो वर्षों से आबादी, प्रचलित या सुरक्षित भूमि पर काबिज हैं, अब प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 (PMAY Urban 2.0) के तहत मकान के लाभार्थी बन सकेंगे। यदि संबंधित व्यक्ति अपने कब्जे से जुड़े वैध साक्ष्य प्रस्तुत करता है, तो नगरीय निकाय द्वारा उसे पात्र हितग्राही प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। इसके आधार पर हितग्राही को योजना में शामिल किया जाएगा।

केंद्र सरकार ने जारी किए नए दिशा-निर्देश

भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने पीएम आवास शहरी 2.0 के क्रियान्वयन को मिशन मोड में संचालित करने के लिए नई प्रक्रिया और दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 1 सितंबर 2024 से प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 की औपचारिक शुरुआत की थी।

31 अगस्त 2024 से पहले का कब्जा होना अनिवार्य

पीएम आवास शहरी 2.0 के तहत वही व्यक्ति पात्र माने जाएंगे, जिनके पास 31 अगस्त 2024 से पहले आबादी, प्रचलित या सुरक्षित भूमि पर कब्जे का प्रमाण मौजूद हो।

कब्जे के साक्ष्य के रूप में निम्न दस्तावेज मान्य होंगे— भूमि का पट्टा, अस्थायी या कालातीत (एक्सपायर) बिजली बिल रसीद, संपत्ति कर रसीद, समेकित कर रसीद हालांकि, यह भी अनिवार्य है कि संबंधित भूमि पूरी तरह विवादमुक्त हो। इस स्थिति में ही पात्र हितग्राही प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।

इन लोगों को नहीं मिलेगा पात्रता प्रमाणपत्र

सरकार ने स्पष्ट किया है कि कुछ श्रेणियों को इस योजना के अंतर्गत पात्रता प्रमाणपत्र नहीं दिया जाएगा। इनमें शामिल हैं— तालाब पार स्थित भूमि, सड़क सीमा के भीतर बने मकान, हाईटेंशन लाइन से प्रभावित क्षेत्र, नगरीय निकाय की योजनाओं से प्रभावित भूमि पर स्थित कच्चे आवास हालांकि, ऐसे पट्टाधारी लाभार्थी आधारित निर्माण (BLC) घटक में शामिल नहीं होंगे, लेकिन वे किफायती आवास भागीदारी (AHP) घटक के अंतर्गत योजना का लाभ ले सकते हैं।

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