
धान खरीदी में कथित अनियमितता के एक गंभीर मामले में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति पिरदा के प्रबंधक रोहित पटेल को न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, सरायपाली पंकज आलोक तिर्की ने जमानत याचिका क्रमांक 02/2026 रोहित पटेल बनाम छत्तीसगढ़ राज्य पर सुनवाई के बाद अग्रिम जमानत आवेदन निरस्त कर दिया।
यह मामला थाना बसना के अपराध क्रमांक 533/2025 से संबंधित है, जिसमें अभियुक्त पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 3(5) के अंतर्गत आरोप दर्ज हैं। न्यायालय ने उभय पक्षों के तर्क, केस डायरी एवं उपलब्ध दस्तावेजों का गहन अवलोकन कर यह निर्णय पारित किया। प्रकरण के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान धान खरीदी कार्य में अनियमितता की शिकायत पर कार्यालय उपायुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं, जिला महासमुंद के आदेशानुसार 30 दिसंबर 2025 की रात्रि धान खरीदी केंद्र पिरदा में आकस्मिक जांच की गई।
जांच दल में नायब तहसीलदार पिथौरा ललित सिंह, मंडी उपनिरीक्षक तथा ग्राम कोटवार शामिल थे। जांच के दौरान धान खरीदी केंद्र परिसर में मेटाडोर वाहन क्रमांक सीजी 06 जी आर 8702 से उतारकर 130 बोरी पुराना एवं गुणवत्ताहीन धान स्टेक कर रखा पाया गया। जांच प्रतिवेदन में इसे शासन की धान उपार्जन नीति 2025-26 के विरुद्ध बताते हुए अवैध रूप से धान खपाने का प्रयास माना गया। इसी आधार पर रोहित पटेल एवं एक राइस मिल संचालक के विरुद्ध थाना बसना में अपराध पंजीबद्ध किया गया।
अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से यह तर्क रखा गया कि कथित सामग्री धान नहीं बल्कि डेनेज (भूसा-बदरा) था तथा जांच विधि विरुद्ध तरीके से की गई। वहीं राज्य की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए मामले को गंभीर प्रकृति का बताया।
न्यायालय ने केस डायरी के अवलोकन में यह पाया कि बरामद 130 बोरी सामग्री को जांच में डेनेज नहीं बल्कि पुराना व अमानक धान बताया गया है। साथ ही अभियुक्त के विरुद्ध पूर्व में दर्ज आपराधिक प्रकरणों का भी उल्लेख किया गया। न्यायालय ने माना कि जमानत दिए जाने की स्थिति में गवाहों को प्रभावित करने, फरार होने अथवा पुनः संज्ञेय अपराध घटित होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने रोहित पटेल की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी।
रोहित पटेल का पलटवार : नायब तहसीलदार पर आर्थिक उगाही का लगाया आरोप
धान खरीदी अनियमितता मामले में अभियुक्त रोहित पटेल ने अपने अग्रिम जमानत याचिका मे जांच अधिकारी नायब तहसीलदार पिथौरा ललित सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। रोहित पटेल का कहना है कि ललित सिंह के द्वारा ग्राम कोटवार के माध्यम से उनसे धान खरीदी कार्य के एवज में आर्थिक मांग की जा रही थी और मांग पूरी न होने पर दुर्भावनावश कार्रवाई की गई।
आवेदक के अनुसार नायब तहसीलदार ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बिना सक्षम मजिस्ट्रेटीय अधिकार के धान खरीदी केंद्र का ताला तोड़कर जांच की तथा बिना पूछताछ और बिना सुनवाई का अवसर दिए जांच प्रतिवेदन तैयार किया। रोहित पटेल ने इस संबंध में 31 दिसंबर 2025 को ई-मेल के माध्यम से लिखित शिकायत कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक महासमुंद को भेजे जाने का भी दावा किया है। हालांकि न्यायालय ने इन आरोपों को जमानत स्तर पर स्वीकार करने योग्य नहीं मानते हुए मामले को विवेचना का विषय बताया और अग्रिम जमानत से इंकार कर दिया।



