रायगढ़ में निजी बसों की मनमानी पर सवाल: क्या यातायात पुलिस का नियंत्रण कमजोर पड़ रहा है?

रायगढ़ |  शहर में भारी वाहनों की बेलगाम आवाजाही को लेकर बुद्धिजीवियों में चर्चा तेज
रायगढ़ – सूत्रों से प्राप्त जानकारी और बुद्धिजीवियों के बीच इन दिनों यह चर्चा जोरों पर है कि क्या यातायात पुलिस द्वारा विद्यालयों एवं निजी कंपनियों के भारी वाहनों (बसों) को शहर में दिन-रात बिना रोक-टोक संचालित करने की अनुमति दे दी गई है। इस स्थिति को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

तेज रफ्तार और समय प्रबंधन के दबाव में नियमों की अनदेखी का आरोप
आरोप है कि निजी विद्यालयों एवं उद्योगों की बसों के चालक समय पर पहुंचने के दबाव में शहर के बीचों-बीच तेज गति से वाहन चला रहे हैं। वहीं, इस पर कार्रवाई के बजाय पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका व्यक्त की जा रही है।

दुर्घटनाओं के बाद कार्रवाई पर उठे सवाल, जांच प्रक्रिया को लेकर भी असंतोष
चर्चा के अनुसार, कई लोग यह भी आरोप लगा रहे हैं कि दुर्घटना होने के बाद ही प्रशासन सक्रिय होता है और उसके बाद जांच एवं औपचारिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होती है। कुछ समय तक नियमों का पालन दिखता है, लेकिन समय बीतने के साथ स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।

परिवहन विभाग के दिशा-निर्देशों के बावजूद नियमों के उल्लंघन का आरोप
बताया जा रहा है कि परिवहन विभाग एवं यातायात पुलिस द्वारा निजी उद्योगों के वाहनों के लिए शहर के बाहर निर्धारित स्थानों एवं चिन्हित चौक-चौराहों पर ही रुकने और कर्मचारियों को वहीं से लेने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद वर्तमान में इन नियमों की अनदेखी किए जाने के आरोप लग रहे हैं।

नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक सख्ती की कमी पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमों का पालन न होने से ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासनिक सख्ती कमजोर पड़ रही है और नियम-कानून का डर भी कम हो गया है। इसी कारण शहर में भारी वाहनों की अव्यवस्थित आवाजाही को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है।

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