रायगढ़ : माधोबन तालाब की जमीन पर दबंगई, मोहल्लेवासियों को निजी संपत्ति बताकर किया जा रहा परेशान, जांच की उठी मांग

रायगढ़ । शहर के मधुबन पारा स्थित माधोबन तालाब की जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि एक राजनीतिक रसूख रखने वाली महिला पंकजलता द्वारा तालाब की जमीन को अपनी निजी संपत्ति बताकर इलाके में दहशत का माहौल बनाया जा रहा है।



पीड़ितों का कहना है कि महिला न केवल तालाब की जमीन पर कब्जा कर उसे टुकड़ों में बेच रही है, बल्कि मोहल्ले के लोगों को धमका रही है और निस्तारी नाली तक तोड़ने की चेतावनी दे रही है। यहां तक कि पट्टाधारकों को उनके घरों के हिस्से खुद तोड़ने या फिर जेसीबी से तुड़वाने की धमकी दी जा रही है, साथ ही खर्च वसूली की बात भी नोटिस में की गई है।



मामले में जांच की मांग, निर्माण और कब्जे की सच्चाई उजागर हो

पीड़ितों का कहना है कि उनके रजिस्ट्री दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से दक्षिण दिशा में माधोबन तालाब दर्ज है, बावजूद इसके महिला उसे निजी संपत्ति बताकर मोहल्लेवासियों का जीना मुश्किल कर रही है। कुछ लोगों को फर्जी नाम से नोटिस भेजे गए हैं, जबकि जिनसे विवाद है उन्हें नोटिस नहीं दिया गया।



मोहल्लेवासियों ने निगम प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो — किसका निर्माण पट्टे की जमीन पर है और किसका अतिक्रमण शासकीय भूमि पर। साथ ही शिकायतकर्ता महिला द्वारा किए गए निर्माण और तालाब पर कथित कब्जे की भी जांच की जाए।



1962 से कब्जे का दावा, लेकिन अतिक्रमण 90 के दशक से शुरू — स्थानीयों का आरोप

शिकायतकर्ता महिला का दावा है कि उनके पुरखों का 1962 से तालाब की जमीन पर कब्जा है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि अतिक्रमण की प्रक्रिया 1990 के बाद शुरू हुई। ऐसे में ऐतिहासिक तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।



“विष्णु के सुशासन में मिलना चाहिए न्याय” — पीड़ितों की अपील

मोहल्लेवासियों ने रायगढ़ निगम प्रशासन से अपील की है कि विष्णु सरकार के सुशासन में इस पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच की जाए ताकि असली दोषियों को बेनकाब किया जा सके और निर्दोषों को न्याय मिल सके।

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