RKM Powergen पर तालाब पाटने का आरोप, रेलवे ट्रैक निर्माण को लेकर किसानों ने कलेक्टर से की शिकायत

सक्ती। जिले के निमोही ग्राम में स्थित एक तालाब को मिट्टी डालकर पाटे जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय किसानों ने आरोप लगाया है कि आरकेएम पावरजेन लिमिटेड द्वारा कोयला परिवहन के लिए रेलवे ट्रैक निर्माण के दौरान तालाब के बड़े हिस्से को मिट्टी से भर दिया गया है। मामले की शिकायत जिला कलेक्टर से की गई है।

तालाब के अस्तित्व पर उठे सवाल

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, ग्राम निमोही स्थित लोहार तालाब का उपयोग वर्षों से ग्रामीणों एवं पशुओं की निस्तारी के लिए किया जाता रहा है। आरोप है कि रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए तालाब के आधे से अधिक हिस्से को मिट्टी डालकर पाट दिया गया है। साथ ही पंप लगाकर तालाब का पानी भी निकाल लिया गया है।

रिकॉर्ड में तालाब दर्ज होने का दावा

शिकायत में कहा गया है कि संबंधित भूमि को कुछ दस्तावेजों में निजी भूमि बताया जा रहा है, जबकि वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में उक्त क्षेत्र तालाब के रूप में दर्ज है। किसानों का कहना है कि यदि रिकॉर्ड में तालाब अंकित है, तो उसे पाटना नियमों के विरुद्ध है और इससे ग्रामीणों की निस्तारी व्यवस्था प्रभावित होगी।

पशुओं के लिए था प्रमुख जल स्रोत

ग्रामीणों का दावा है कि उक्त तालाब वर्षभर पानी से भरा रहता था और गर्मी के मौसम में भी पूरी तरह नहीं सूखता था। गांव के गाय-बैल सहित अन्य पशुओं के लिए यह प्रमुख जल स्रोत था। तालाब को पाटे जाने से ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

शिकायतकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों का हवाला दिया है जिनमें सार्वजनिक उपयोग एवं निस्तारी वाले जलाशयों के संरक्षण पर जोर दिया गया है। उनका कहना है कि ऐसे तालाबों को समाप्त करना पर्यावरण और ग्रामीण हितों के विपरीत है।

कलेक्टर ने जांच के दिए संकेत

मामले की शिकायत जिला कलेक्टर तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। जानकारी के अनुसार कलेक्टर ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही है।

जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट

फिलहाल तालाब पाटे जाने और भूमि की वास्तविक स्थिति को लेकर विभिन्न दावे सामने आ रहे हैं। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित भूमि का राजस्व रिकॉर्ड क्या है तथा निर्माण कार्य नियमों के अनुरूप किया जा रहा है या नहीं।

नोट : यह समाचार शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। संबंधित कंपनी एवं प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आना शेष है।

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