“एक राष्ट्र, एक चुनाव” विषय पर लैलूंगा में विचार गोष्ठी, जनहित और राष्ट्रहित में उठाई गई सशक्त आवाज


लैलूंगा | संवाददाता – नटवर अग्रवाल
छत्तीसगढ़ चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, लैलूंगा इकाई के तत्वावधान में एवं भाजपा के तीनों मंडलों के सहयोग से “एक राष्ट्र, एक चुनाव” विषय पर एक भव्य विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आमजन को इस विषय की गंभीरता से अवगत कराना और जनमत तैयार करना था ताकि देश के लोकतांत्रिक ढांचे को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जा सके।



राज्यसभा सांसद और भाजपा जिलाध्यक्ष ने रखे अपने विचार

मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह (राजा साहब) ने कहा कि “वन नेशन, वन इलेक्शन” न केवल समय और धन की बचत करेगा, बल्कि प्रशासनिक बोझ भी कम करेगा। बार-बार चुनावों से विकास कार्यों में रुकावट आती है, जिससे योजनाएं प्रभावित होती हैं।



भाजपा जिलाध्यक्ष अरुण धर दीवान ने बताया कि अलग-अलग चुनावों से नीतिगत निर्णयों में देरी होती है और सरकारी संसाधनों का अत्यधिक व्यय होता है। एकसाथ चुनाव होने से लगभग 1.5% तक आर्थिक विकास दर बढ़ सकती है, महंगाई में कमी आएगी और शासन की स्थिरता सुनिश्चित होगी।



चेंबर अध्यक्ष और सदस्यों ने भी रखे विचार

चेंबर अध्यक्ष मनीष मित्तल ने कहा कि एक राष्ट्र, एक चुनाव से चुनावी खर्च, टैक्स बोझ और राजनीतिक दलों के अनावश्यक व्यय में कमी आएगी, जिससे भ्रष्टाचार घटेगा और वोटिंग प्रतिशत बढ़ेगा।

कार्यक्रम का संचालन विपुल मित्तल ने किया।
अंत में प्रवक्ता नटवर निंगानिया ने सभी अतिथियों का आभार प्रकट करते हुए कार्यक्रम की विधिवत समाप्ति की घोषणा की।

कार्यक्रम में रही गणमान्य लोगों की उपस्थिति

गोष्ठी में पूर्व संसदीय सचिव सत्यानंद राठिया, भाजपा जिला महामंत्री सतीशचंद्र बेहरा, जिला उपाध्यक्ष श्रीमती शांता साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष दीपक सिदार, जनपद अध्यक्ष श्रीमती ज्योति भगत, नगर पंचायत अध्यक्ष कपिल सिंघानिया, मंत्री अमित गर्ग, प्रेस क्लब अध्यक्ष चंद्रशेखर जायसवाल, सहित चैंबर और भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी व सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

एकता, जागरूकता और संवाद का संदेश

इस गोष्ठी के माध्यम से चेंबर ऑफ कॉमर्स ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए विमर्श, संवाद और नागरिक सहभागिता आवश्यक है। उपस्थित सभी लोगों ने एकमत होकर “एक राष्ट्र, एक चुनाव” के विचार को समय की मांग बताया और इसका समर्थन किया।

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