कोरोना वायरस के मामले में भारत की स्थिति की दुनिया में बेहद खराब चल रही है। देश में टीकाकरण की गति धीमी हो गई है और लगातार कोरोना वायरस मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले महीने की शुरुआत से कोरोना टीकाकरण की गति में लगातार गिरावट देखी गई है, क्योंकि वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां मांग के अनुसार सप्लाई और आयात को बढ़ाने में संघर्ष कर रही हैं।
5 अप्रैल को प्रतिदिन होने वाले टीकाकरण की संख्या 45 लाख पहुंच गई थी जो अब औसतन 25 लाख पर आ गई है। बढ़ते कोरोना वायरस के मामलों के कारण देश के कई हिस्सों में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली ध्वस्त हो गई है। सरकार के को-विन https://dashboard.cowin.gov.in पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन बनाने की क्षमता वाले भारत ने अपने 1.35 बिलियन लोगों में से केवल 9.5% लोगों को आंशिक या पूर्ण रूप से प्रतिरक्षित किया है। मतलब अभी केवल लगभग 10 प्रतिशत लोगों का ही वैक्सीनेशन हो पाया है।
वैक्सीन बनाने वाली दो कंपनियों का फोरकास्ट बताता है कि उनकी वैक्सीन बनाने की क्षमता अभी 7-8 करोड़ प्रति माह ही है और इसे बढ़ाने में उन्हें कुछ महीने या उससे अधिक समय लगेगा जबकि 1 मई से 18 साल से ऊपर के लोगों भी वैक्सीनेशन खुल गया है जिसके बाद टीका लगवाने वालों की संख्या 80 करोड़ पहुंच गई हैं।भारत में शनिवार को रूस की स्पुतनिक 5 वैक्सीन की 1.5 लाख खुराक पहुंची और सरकार ने कहा कि अभी कई लाख खुराकें भारत आएंगी।