श्रीमद् भागवत कथा सुन, निहाल हो रहे, तेंदू डीपा, देवार पारा के बसीदें

रायगढ़, 11 जनवरी को कलश यात्रा से प्रारंभ हुई श्रीमद् भागवत कथा, पंडित श्री श्री भारत भूषण शास्त्री जी के मुखारविंद से निकल कर, सीधे भक्त रूपी श्रोताओं के हृदय में समाहित होकर परमपिता परमेश्वर में समाहित होते हुए देवार पारा , तेंदू डीपा , वार्ड क्रमांक 38 एवं वार्ड क्रमांक 42 के निवासियों को भक्ति रस के सरोवर में गोते लगाने का कार्य कर रही है।

कहते हैं ना कि जिस प्रकार भगवान अपने भक्तों के बगैर अधूरे रहते हैं, उसी प्रकार पंडित श्री श्री भारत भूषण शास्त्री कथा वाचक के प्रवचन और सुरों को श्री वंश अरोड़ा के सुर एवं साथियों के संगीत, दिन प्रतिदिन भक्ति रस की अमृत धारा मैं और अधिक मिठास भरकर वातावरण को निरंतर आनंदित कर रही है। एवं पंडित श्री श्री भारत भूषण शास्त्री के सहायक के रूप में आचार्य गणेश मिश्रा जी एवं आचार्य श्री अजय महापात्र जी पूरे पूजा पाठ एवं मंच नियंत्रण पर अपनी पूरी पेठ रखते हुए शास्त्री जी के अश्वमेध यज्ञ के घोड़े की भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।

पंडित श्री भारत भूषण शास्त्री के मुखारविंद से कपिल उपाख्यान, वराह अवतार के साथ प्रहलाद चरित्र एवं नर्सिंग अवतार का जो व्याख्यान किया गया, ऐसा जीवंत व्याख्यान बिरले ही सुनने को मिलते हैं।

जहां एक तरफ प्रहलाद चरित्र के विभिन्न बिंदुओं के व्याख्यान के बाद श्रोताओं के आंख नम होते दिखे, वही व्यास पीठ से जब नर्सिंग अवतार और हिरण कश्यप बध का प्रसंग श्रोताओं के कानों तक पहुंची तो पूरे खचाखच भरे पंडाल मैं बैठे  भक्तगणों के रोंगटे खड़े हो गए और उनके द्वारा तालियों की गर्गाराहाट और जयकारे से भगवान नरसिंह का स्वागत के साथ आभार प्रदर्शन किया गया।

ज्ञात हो की इस पावन, पवित्र श्रीमद् भागवत कथा के मुख्य जजमान, श्री सुदेश लाला और उनकी धर्म पत्नी श्रीमती चंद्रकांता लाला के द्वारा इतने बड़े आयोजन के संकल्प में श्री समीर गुप्ता एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सोनू गुप्ता एवं जजमान के पारिवारिक मित्र श्री रामा के परिश्रम को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
आज व्यास पीठ से श्री कृष्णा जन्मोत्सव जैसे महत्वपूर्ण प्रसंग पर कथा वाचन किया जाएगा। उक्त वृतांत विमल चौधरी के कलम से समाविष्ट किया गया।

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