UPI यूजर्स को नहीं देना होगा कोई चार्ज, दुकानदारों पर कैसे पड़ेगा MDR का असर?
सरकार की सफाई के बाद दूर हुआ भ्रम; आम ग्राहक के UPI भुगतान पर शुल्क नहीं, संभावित MDR का असर कुछ कारोबारियों पर पड़ सकता है
नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026। UPI भुगतान को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही चार्ज लगने की चर्चाओं के बीच सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। आम UPI यूजर्स को भुगतान करने पर कोई ट्रांजैक्शन फीस नहीं देनी होगी। यानी Google Pay, PhonePe, Paytm या किसी अन्य UPI ऐप से सामान्य भुगतान करने वाले ग्राहक पर सीधे कोई शुल्क लगाने की बात नहीं है।
हालांकि, चर्चा Merchant Discount Rate यानी MDR को लेकर है। MDR वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर ले सकता है। सरकार की मौजूदा स्थिति के मुताबिक, यदि भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो इसे कुछ चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन तक सीमित रखने की संभावना है।
क्या ग्राहक से पैसे लिए जाएंगे?
नहीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांसफर मुफ्त रहेगा। उदाहरण के लिए किसी दोस्त या रिश्तेदार को ₹5,000 भेजने पर UPI ऐप अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाएगा।
इसी तरह, मौजूदा सरकारी प्रावधानों में UPI भुगतान करने वाले ग्राहक या भुगतान प्राप्त करने वाले पर सीधे शुल्क लगाने की व्यवस्था नहीं है।
फिर MDR की चर्चा क्यों?
UPI के जरिए दुकानों और कारोबारियों को भुगतान मिलने पर बैंकिंग और पेमेंट सिस्टम को इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक और ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग की लागत आती है। अभी UPI पर Zero MDR व्यवस्था के कारण यह शुल्क सामान्य तौर पर व्यापारी से नहीं लिया जाता।
सरकार की नई व्यवस्था से इस ढांचे में भविष्य में सीमित बदलाव की गुंजाइश बनाई जा रही है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर UPI भुगतान पर MDR लग जाएगा।
दुकानदारों पर क्या असर पड़ेगा?
यदि चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू किया जाता है, तो संबंधित दुकानदार या कारोबारी को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की लागत का कुछ हिस्सा देना पड़ सकता है।
मसलन, यदि किसी बड़े कारोबारी के लिए किसी ट्रांजैक्शन पर 0.5% MDR लागू होता है और ग्राहक ₹10,000 का भुगतान करता है, तो शुल्क ₹50 होगा। यह शुल्क ग्राहक के UPI ऐप से अलग से नहीं काटा जाएगा; यह मर्चेंट के पेमेंट सेटलमेंट से संबंधित शुल्क होगा।
महत्वपूर्ण बात: अभी MDR की अंतिम दर और किन कारोबारियों पर यह लागू होगा, इसे लेकर कोई सार्वभौमिक अंतिम दर घोषित नहीं हुई है। इसलिए 0.3%, 0.5% या किसी निश्चित सीमा को वर्तमान नियम मानना सही नहीं होगा।
छोटे दुकानदारों को राहत की संभावना
सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि UPI की सबसे बड़ी ताकत—आम लोगों और छोटे कारोबारियों के लिए आसान डिजिटल भुगतान—प्रभावित न हो। मौजूदा सरकारी प्रोत्साहन व्यवस्था में छोटे कारोबारियों के लिए ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर Zero MDR की व्यवस्था भी रही है।
इसलिए किराना दुकान, सब्जी विक्रेता, छोटे व्यापारी या आम दुकानदार के लिए अभी यह कहना सही नहीं है कि हर UPI भुगतान पर शुल्क देना शुरू हो जाएगा।
आम UPI यूजर के लिए क्या बदलेगा?
फिलहाल कुछ नहीं। ग्राहक पहले की तरह QR कोड स्कैन करके भुगतान कर सकता है। उसके खाते से जितनी रकम भेजी जाएगी, उतनी ही राशि भुगतान के रूप में जाएगी।
यानी UPI खत्म नहीं हो रहा और न ही आम ग्राहक के लिए UPI चार्ज लागू हुआ है। विवाद और चर्चा मुख्य रूप से इस बात पर है कि भविष्य में कुछ बड़े या पात्र मर्चेंट लेनदेन पर MDR के जरिए पेमेंट सिस्टम की लागत कैसे वसूली जाए।



