अंबिकापुर में दो एकड़ संरक्षित वन भूमि कब्जामुक्त, प्रशासन ने हटाया वर्षों पुराना अतिक्रमण
वन भूमि पर चला बुलडोजर, 39 अवैध मकान ध्वस्त; भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई
अंबिकापुर। सरगुजा जिले के अंबिकापुर में वन भूमि पर किए गए अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में संरक्षित वन क्षेत्र में बने 39 अवैध मकानों को ध्वस्त कर करीब दो एकड़ वन भूमि को कब्जामुक्त कराया गया। कार्रवाई के दौरान मौके पर तनावपूर्ण स्थिति भी बनी रही।
संरक्षित वन क्षेत्र में बने थे अवैध मकान
जानकारी के अनुसार नगर निगम क्षेत्र से लगे रनपुर खुर्द के चोरकाकछार स्थित संरक्षित वन क्षेत्र में वर्षों से अवैध कब्जा कर मकान बनाए गए थे। वन विभाग की जांच में कुल 42 लोगों द्वारा लगभग दो एकड़ वन भूमि पर कब्जा किए जाने की पुष्टि हुई थी।
वन विभाग द्वारा पूर्व में कई बार नोटिस जारी किए गए थे। अंतिम बेदखली नोटिस के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की।
42 में से 39 मकान तोड़े गए
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार 42 कब्जाधारियों में से तीन लोगों ने वन अधिकार पट्टा से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिसके चलते उनके मामलों की अलग से जांच की जा रही है। शेष 39 मकानों को अवैध पाए जाने पर ध्वस्त कर दिया गया।
सुबह से शुरू हुई कार्रवाई, तैनात रहा भारी पुलिस बल
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुबह से शुरू हुई। किसी भी प्रकार के विरोध या कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों और वन विभाग की टीम ने मौके पर मौजूद रहकर पूरी कार्रवाई की निगरानी की।
कब्जाधारियों ने जताई नाराजगी
कार्रवाई के दौरान कई परिवारों ने प्रशासन के फैसले पर नाराजगी जताई। कुछ लोगों का कहना था कि उन्हें सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। बुलडोजर कार्रवाई के दौरान लोग अपने घरों से सामान निकालते नजर आए और कई परिवार भावुक भी हो गए।
वन भूमि बचाने के लिए सख्ती
प्रशासन का कहना है कि संरक्षित वन क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक वन भूमि की सुरक्षा और संरक्षण के लिए आगे भी ऐसे अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
जांच और निगरानी जारी
वन विभाग और जिला प्रशासन अब क्षेत्र की निगरानी बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि भविष्य में दोबारा वन भूमि पर अवैध कब्जा न हो सके। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी और वन भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।



