कार्यकर्ताओं में आक्रोश…हिली नेताओं की जमीन! मिशन 2023 की तैयारी में जुटी बीजेपी को लगेगा झटका?

रायपुर:  आज बात पार्टी विद डिफरेंस मानने वाली भारतीय जनता पार्टी की. खुद को अनुशासित और कैडर बेस्ड पार्टी बताने वाली बीजेपी में एक बार फिर अंदरूनी कलह सड़क पर आई है। प्रदेश के तीन नगरीय निकायों में स्पष्ट बहुमत के बावजूद पार्टी को सत्ता से बेदखल होना पड़ा। आलम ये है कि कोंडागांव और पत्थलगांव में खुद बीजेपी पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर अपने अध्यक्ष को कुर्सी से बाहर कर दिया, तो मुंगेली में पार्टी को क्रॉस वोटिंग का खामियाजा भुगतना पड़ा। अब सवाल ये है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं में आक्रोश की वजह क्या है? क्या है इसके पीछे के सियासी मायने? क्या मिशन 2023 की तैयारी में जुटी बीजेपी को इन घटनाओं से झटका लगेगा?

छत्तीसगढ़ में 15 साल बाद विपक्ष में बैठी बीजेपी अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है ये कहना गलत नहीं होगा। निकाय चुनावों में मिली करारी हार से एक बार फिर ये साबित हो गया, बावजूद इसके पार्टी कोई सबक लेने के मूड में नहीं है। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय, प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी और राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश लगातार कार्यकर्ताओँ को रिचार्ज और एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन कार्यकर्ताओं की नाराजगी, विरोध स्वरूप अब खुलकर सतह पर आ रही है। आलम ये है प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय के गृह जिले पत्थलगांव में बगावत की खबर है।

दरअसल 15 सदस्यीय पत्थलगांव नगर पंचायत में बीजेपी के 9 और काग्रेस के 5 पार्षद हैं। लेकिन बीजेपी पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर अपने ही अध्यक्ष सुचिता एक्का को बाहर करा दिया। यही हाल कोंडागांव नगरपालिका का है। 22 पार्षदों वाली पालिका में 14 पार्षद बीजेपी के हैं, लेकिन उसके 8 पार्षदों ने बगावत कर दिया है। उनके अविश्वास प्रस्ताव को कांग्रेस के 8 पार्षद समर्थन दे चुके हैं, ऐसे में यहां भी तख्तापलट तय है। जबकि मुंगेली नगरपालिका में बीजेपी क्रॉस वोटिग का खामियाजा भुगतना पड़ा। बीजेपी में चल रहे उठापटक पर कांग्रेस नेता जरूर चुटकी ले रहे हैं, उनके मुताबिक बीजेपी की अंतर्कलह अब खुलकर सामने आ रही है। कांग्रेस का ये भी दावा है कि भूपेश सरकार के बेहतरीन काम के चलते बीजेपी पार्षदों का हृदय परिवर्तन हो रहा है।

हालांकि बीजेपी की मुश्किलें केवल तीन नगरीय निकाय तक सीमित नही है। बाकी इलाकों से भी इस तरह की बगावत की खबरें सामने आ रही है। ऐसे में सवाल है कि बीजेपी के भीतर अंतर्कलह और अंदरुनी विरोध की असल वजह क्या है। हालांकि बीजेपी नेता इसे सामान्य बता रहे हैं, उनके मुताबिक पार्टी के भीतर गुटबाजी जैसी कोई बात नहीं है। बल्कि सरकार सत्ता के बल पर उनके पार्षदों को लालच और भय दिखा कर तोड़ने का काम कर रही है।

बीजेपी अगर प्रदेश में 15 साल बाद सत्ता से बेदखल हुई तो, उसमें गुटबाजी और कार्यकर्ताओं की नाराजगी सबसे बड़ी वजह रही। ऐसे में जब बीजेपी संगठन मिशन 2023 की तैयारियों में जुटा है। तमाम बड़े नेता पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओँ को एकजुट होने की नसीहत दे रहे हैं। तब कार्यकर्ताओं का अपने ही नेताओँ को खिलाफ आक्रोश कई सवाल खड़े करता है।

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