चुनाव आयोग में विवाद: दो चुनाव आयुक्तों ने वरिष्ठ अधिकारी की शिकायत की, RTI में खुलासा
नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) में वरिष्ठ अधिकारियों के बीच प्रशासनिक मतभेद का मामला सामने आया है। सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत मिले दस्तावेजों से पता चला है कि चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के कामकाज पर आपत्ति जताते हुए 29 जुलाई 2026 को कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखे थे। दोनों अधिकारियों ने मामले में उचित कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, कैबिनेट सचिवालय ने कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से औपचारिक सामूहिक शिकायत के अभाव में सीधे कार्रवाई करना उचित नहीं होगा।
कार्य-विभाजन में बदलाव को लेकर उठा विवाद
रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद 28 जुलाई 2026 को जारी एक आदेश से शुरू हुआ। उस समय वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग को प्रशासनिक प्रभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। इसके बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के बीच काम के बंटवारे में बदलाव से संबंधित आदेश जारी किया।
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने आरोप लगाया कि कार्य-विभाजन में बदलाव करने से पहले निर्वाचन आयोग या संबंधित अधिकारियों से चर्चा नहीं की गई। उनके मुताबिक, इस तरह का आदेश आयोग के निर्देशों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था।
दूसरे चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने भी इसी तरह की आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संबंधित फाइल मांगे जाने के बावजूद उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई। दोनों आयुक्तों ने अपने पत्रों में संबंधित अधिकारी के कामकाज पर सवाल उठाते हुए उचित कार्रवाई की मांग की थी।
कैबिनेट सचिवालय ने कार्रवाई से क्यों परहेज किया?
RTI के तहत सामने आई फाइल नोटिंग के अनुसार, कैबिनेट सचिवालय ने दोनों चुनाव आयुक्तों की शिकायतों को गंभीरता से लिया, लेकिन यह भी कहा कि पत्र व्यक्तिगत हैसियत से भेजे गए थे। इन्हें पूरे निर्वाचन आयोग की आधिकारिक शिकायत नहीं माना जा सकता।
फाइल नोटिंग में कहा गया कि निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। ऐसे में आयोग की ओर से औपचारिक और सामूहिक पत्राचार के बिना किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करना अनुचित हो सकता है और इसे आयोग के कामकाज में कार्यपालिका के हस्तक्षेप के रूप में भी देखा जा सकता है।
इसके बाद कैबिनेट सचिवालय ने दोनों आयुक्तों को पत्र मिलने की जानकारी दी और मामले से संबंधित दस्तावेज मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय तथा कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के अधिकारियों को भेजे।
5 अगस्त को भेजा गया था जवाब
दस्तावेजों के अनुसार, कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने 5 अगस्त 2026 को दोनों चुनाव आयुक्तों के पत्रों की प्राप्ति स्वीकार की थी। पत्रों में वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के कामकाज से संबंधित शिकायतों का उल्लेख किया गया था।
RTI के जवाब में मिली जानकारी से यह स्पष्ट होता है कि शिकायतों को दर्ज कर संबंधित कार्यालयों तक पहुंचाया गया। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों से यह पुष्टि नहीं होती कि इसके बाद आरोपों की जांच हुई या संबंधित अधिकारी के खिलाफ कोई अन्य कार्रवाई की गई।
निर्वाचन आयोग ने भी दी थी सफाई
निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर 2026 को जारी अपने बयान में स्पष्ट किया था कि कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र आयोग की नीतियों या आईटी विभाग से जुड़े किसी नीतिगत विवाद के बारे में नहीं थे। आयोग के अनुसार, मामला प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज और कार्य-विभाजन से संबंधित था।
आयोग ने यह भी कहा था कि संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्य-विभाजन का आदेश दोनों चुनाव आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किया गया। साथ ही, आयोग ने आईटी विभाग की निगरानी हटाए जाने की बात से भी इनकार किया था।
मतदाता सूची के मुद्दों पर भी सामने आई थी असहमति
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब निर्वाचन आयोग के भीतर कुछ अन्य मुद्दों पर भी मतभेद की खबरें आई थीं। द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने लगभग 10 महीनों के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने, नाम हटाने और मतदाता डेटाबेस से संबंधित कुछ फैसलों पर 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्रों को नीतिगत मतभेद के बजाय एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा मामला बताया था। इसलिए दोनों प्रकरणों को अलग-अलग संदर्भों में देखना महत्वपूर्ण है।
RTI से सामने आए प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े सवाल
RTI के जरिए सामने आए दस्तावेजों ने निर्वाचन आयोग में कार्य-विभाजन, अधिकारियों के अधिकारों और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता से जुड़े सवालों को सामने रखा है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी शिकायतों, कैबिनेट सचिवालय की फाइल नोटिंग और पत्रों की प्राप्ति तक सीमित है। आगे किसी जांच या कार्रवाई की पुष्टि संबंधित अधिकारियों की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली जानकारी से ही हो सकेगी।
