छाल-एडू स्टेट हाईवे पर घंटों जाम, बदहाल सड़क से परेशान ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
गड्ढों, कीचड़ और धूल के बीच फंसे सैकड़ों वाहन; सड़क निर्माण में देरी को लेकर उठ रहे सवाल
कुड़ेकेला। छाल क्षेत्र को एडू से जोड़ने वाले मुख्य स्टेट हाईवे की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है। गुरुवार को सड़क पर लंबा जाम लगने से कई घंटे तक आवागमन प्रभावित रहा। सड़क पर बने गड्ढों, कीचड़ और धूल के कारण छोटी-बड़ी गाड़ियों के साथ यात्री वाहन भी जाम में फंसे रहे। इससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जर्जर सड़क के कारण आए दिन बन रहे जाम के हालात
स्थानीय लोगों के अनुसार छाल-एडू मार्ग लंबे समय से खराब स्थिति में है। जगह-जगह गड्ढे होने और बारिश के दौरान सड़क पर कीचड़ जमा होने से वाहनों की रफ्तार प्रभावित होती है। भारी वाहनों की आवाजाही के बीच कई बार यातायात का दबाव बढ़ने पर जाम की स्थिति बन जाती है।
गुरुवार को भी ऐसी ही स्थिति बनी और देखते ही देखते वाहनों की लंबी कतार लग गई। घंटों तक यातायात प्रभावित रहने से लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में देरी हुई।
सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से उठ रही
क्षेत्र की इस प्रमुख सड़क के निर्माण और सुधार की मांग लंबे समय से उठती रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से अलग-अलग समय पर सड़क की स्थिति को लेकर आवाज उठाई गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार आंदोलन और प्रदर्शन के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। उनका आरोप है कि हर बार आश्वासन मिलने के बावजूद सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
उद्योगों और खनन गतिविधियों वाले क्षेत्र में सड़क व्यवस्था पर सवाल
छाल क्षेत्र में कोयला खनन और औद्योगिक गतिविधियों के चलते भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र से सरकार को बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त होता है, इसके बावजूद क्षेत्र की प्रमुख सड़क की स्थिति लंबे समय से खराब बनी हुई है।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब इस मार्ग का इस्तेमाल आम लोगों के साथ औद्योगिक परिवहन के लिए भी होता है, तो इसके स्थायी सुधार की दिशा में तेजी से काम क्यों नहीं हो रहा।
CSR फंड के इस्तेमाल को लेकर भी उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों ने उद्योगों से मिलने वाली कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) राशि के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग सड़क जैसी जरूरी सुविधा को बेहतर बनाने में किया जाना चाहिए।
हालांकि CSR राशि का वास्तविक उपयोग और इस सड़क के निर्माण से उसका संबंध संबंधित विभाग एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार ही स्पष्ट हो सकता है।
सड़क को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज
सड़क निर्माण में देरी को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों द्वारा यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों का असर विकास कार्यों की गति पर पड़ रहा है।
वहीं विपक्षी विधायक को लेकर जानबूझकर सड़क निर्माण में देरी किए जाने जैसे आरोप भी स्थानीय चर्चाओं में सामने आ रहे हैं। हालांकि इस संबंध में कोई ठोस आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
स्कूली बच्चों से मरीजों और व्यापारियों तक प्रभावित
बदहाल सड़क का असर क्षेत्र के अलग-अलग वर्गों पर पड़ रहा है। स्कूली बच्चों, कर्मचारियों, व्यापारियों और मरीजों को आवागमन में परेशानी होने की बात स्थानीय लोगों ने कही है।
बारिश में कीचड़ और गड्ढों की समस्या बढ़ने के साथ धूल के कारण भी लोगों को दिक्कत होती है। लगातार जाम की स्थिति बनने से रोजमर्रा के आवागमन पर भी असर पड़ रहा है।
अब स्थायी समाधान की मांग
क्षेत्रवासियों की मांग है कि छाल-एडू स्टेट हाईवे की वास्तविक स्थिति का तकनीकी निरीक्षण कर सड़क निर्माण या बड़े पैमाने पर मरम्मत का काम जल्द शुरू किया जाए। साथ ही भारी वाहनों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए सड़क को मजबूत और सुरक्षित बनाने की मांग की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में सड़क को लेकर आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है। अब लोगों की नजर प्रशासन और संबंधित विभाग की अगली कार्रवाई पर है।












