जब खुद व्यापारी के द्वार पहुंचे कर अधिकारी: रायगढ़ में ‘व्यापारी कर संवाद’ ने तोड़ी बरसों पुरानी हिचकिचाहट, भरोसे की नई इबारत लिखी..

ढिमरापुर रोड के निजी होटल में कैट और आयकर विभाग की ऐतिहासिक पहल; ‘एक प्रदेश, एक दिन, एक संवाद’ अभियान से व्यापारियों के चेहरों पर लौटी मुस्कान..

रायगढ़ :- अब आयकर विभाग का नाम सुनकर व्यापारियों के माथे पर चिंता की लकीरें नहीं उभरेंगी, बल्कि सहयोग और साझेदारी का नया दौर नजर आएगा। रायगढ़ की व्यापारिक आबोहवा में यह सुखद बदलाव बुधवार को उस वक्त साफ दिखा, जब आयकर विभाग के आला अधिकारी फाइलों और दफ्तरों से निकलकर सीधे व्यापारियों के बीच उनकी बात सुनने जा रहे थे। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) छत्तीसगढ़ और आयकर विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ढिमरापुर रोड स्थित एक होटल के सभागार में आयोजित ‘व्यापारी कर संवाद’ कार्यशाला केवल नियमों की औपचारिकता तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह प्रशासन और करदाताओं के बीच अविश्वास की पुरानी दीवारों को ढहाने वाला एक ऐतिहासिक मंच साबित हुई। शाम 4 बजे से देर तक चले इस आयोजन में जिलेभर के प्रमुख कारोबारी, खुदरा दुकानदार, चैंबर प्रतिनिधि और कर विशेषज्ञ बड़ी संख्या में शामिल हुए और इस अनूठी पहल के गवाह बने।

‘एक प्रदेश, एक दिन, एक संवाद’ से पूरे राज्य में गूंजा साझेदारी का संदेश..

यह आयोजन ‘एक प्रदेश, एक दिन, एक संवाद’ के राज्यव्यापी महाअभियान का हिस्सा था, जिसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख जिलों में एक ही दिन संचालित कर नया कीर्तिमान रचा गया। इसका मूल मंत्र यही था कि राष्ट्र के विकास में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले व्यापारी वर्ग को सम्मान मिले और कर प्रशासन एक दंडात्मक तंत्र की बजाय सहयोगी मित्र की भूमिका में नजर आए। रायगढ़ के इस कार्यक्रम में यह भावना पूरी तरह जीवंत दिखी। पूरे सभागार में उस वक्त सकारात्मक ऊर्जा भर गई, जब अधिकारियों ने व्यापारियों के साथ आमने-सामने बैठकर उनकी हर शंका को सहजता और आत्मीयता से सुना।

डिजिटल और फेसलेस सिस्टम: अब दफ्तरों के चक्कर काटने का दौर गुजरे जमाने की बात..

सभागार को संबोधित करते हुए आयकर विभाग रायगढ़ के वरिष्ठ अधिकारियों ने कर प्रणाली के आधुनिक और सुधरे हुए चेहरे को सामने रखा। अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज का आयकर तंत्र पूरी तरह फेसलेस, डिजिटल और पारदर्शी हो चुका है। अब किसी भी व्यापारी को दफ्तरों की सीढ़ियां चढ़ने या किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं है; पोर्टल पर एक क्लिक के जरिए हर औपचारिकता पूरी की जा सकती है। उन्होंने व्यापारियों को सरल भाषा में समझाया कि रिटर्न फाइलिंग, ऑडिट और टीडीएस-टीसीएस की प्रक्रियाएं कोई अड़चन नहीं, बल्कि व्यापार की वित्तीय साख और साख सीमा (क्रेडिट) को मजबूत करने का जरिया हैं। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि समय पर और सही कर अदायगी करने वाला व्यापारी देश के निर्माण में सेना के जवान जितना ही महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

छोटे व्यापारियों का डर मिटाना और संवाद की खाई पाटना बना सबसे बड़ा उद्देश्य..

कार्यशाला के दौरान सबसे भावुक और प्रासंगिक मुद्दा छोटे दुकानदारों और खुदरा व्यापारियों का उठा। मंच से वक्ताओं ने बड़ी बेबाकी से रेखांकित किया कि बड़े कॉरपोरेट घराने तो महंगे सीए और वकीलों की फौज खड़ी करके कानूनी दांवपेच सुलझा लेते हैं, लेकिन एक आम खुदरा व्यापारी या मध्यम दर्जे का दुकानदार नोटिस या विभाग का नाम सुनते ही घबरा जाता है। संवाद का असली मकसद इसी खौफ को जड़ से उखाड़ फेंकना था। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि विभाग किसी को परेशान करने नहीं, बल्कि सही रास्ता दिखाने के लिए है। वक्ताओं ने व्यापारियों को जागरूक करते हुए कहा कि सरकार द्वारा 12 लाख रुपये तक की आय पर धारा 87A के तहत मिलने वाले टैक्स रिबेट और नई कर व्यवस्था के फायदों को खुलकर समझना चाहिए। जब नियम सरल हों और नीयत साफ हो, तो व्यापार को मुख्यधारा में लाकर ही सबसे ज्यादा सुकून और तरक्की मिलती है।

खुले मंच पर हुआ सवालों का दंगल, अधिकारियों ने हर उलझन को मौके पर सुलझाया..

कार्यक्रम का सबसे जीवंत और दिलचस्प हिस्सा रहा सवाल-जवाब का खुला सत्र। यहां व्यापारियों ने बिना किसी संकोच के अपने दिल की बात सामने रखी। टीडीएस कटौती की व्यावहारिक दिक्कतों, नोटिस मिलने पर होने वाली घबराहट, पोर्टल की तकनीकी बारीकियों और रिटर्न फाइलिंग में आने वाली पेचीदगियों पर व्यापारियों ने सीधे अधिकारियों से सवाल दागे। अधिकारियों ने भी किसी प्रशासनिक भाषा की आड़ लिए बिना, बिल्कुल सहज और सरल लहजे में हर सवाल का बिंदुवार व सटीक समाधान पेश किया। सवालों के इस सीधे और त्वरित निवारण को देखकर उपस्थित व्यापारियों ने करतल ध्वनि से अधिकारियों के इस रुख का स्वागत किया और माना कि अगर ऐसे मंच पहले मिलते तो कई गलतफहमियां कभी पनपती ही नहीं।

विश्वास की यह मजबूत डोर आगे भी रहेगी कायम: कैट..

कैट रायगढ़ इकाई के पदाधिकारियों ने इस सफल आयोजन पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह कार्यशाला सिर्फ एक दिन का संवाद नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत है। जब प्रशासन खुद अपने दरवाजे खोलकर व्यापारियों के सुख-दुख में शरीक होता है, तो अफवाहों और भ्रांतियों की गुंजाइश खत्म हो जाती है। व्यापारियों ने एक सुर में कहा कि ऐसे आयोजनों से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और वे दोगुने उत्साह से अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाएंगे। कार्यक्रम के अंत में विभाग के अधिकारियों और उपस्थित सभी व्यापारी साथियों का आभार जताया गया, और यह प्रण लिया गया कि जागरूकता और विश्वास की इस मुहिम को जिले के हर कोने तक पहुंचाया जाएगा।

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