तिब्बत में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, 16 लोगों की मौत; चीन और म्यांमार में भी लगे झटके
तिब्बत/बीजिंग। चीन के तिब्बत क्षेत्र में आए 7.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई है और 32 लोग घायल हुए हैं। कई मकानों के ढहने की भी खबर है। इसके साथ ही चीन के अन्य हिस्सों और पड़ोसी देश म्यांमार में भी भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की गईं।
तिब्बत में रात को आया 7.0 तीव्रता का भूकंप
भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, 22 अक्टूबर 2026 को रात 8 बजकर 3 मिनट 42 सेकंड पर तिब्बत में 7.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र लगभग 15 किलोमीटर की गहराई पर था।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, भूकंप से प्रभावित इलाके में मकानों को नुकसान पहुंचा है। स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
भूकंप के बाद भी आते रहे झटके
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के आंकड़ों में मुख्य भूकंप के बाद तिब्बत और आसपास के क्षेत्रों में कई और झटके दर्ज किए गए। इनमें 5.0, 4.8, 4.7 और 4.6 तीव्रता के भूकंप भी शामिल हैं। मुख्य भूकंप के बाद आने वाले ऐसे झटकों को आफ्टरशॉक कहा जाता है।
लगातार झटकों के कारण क्षतिग्रस्त इमारतों में रहना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों की सलाह का पालन करना जरूरी है।
चीन में 5.2 और म्यांमार में 3.5 तीव्रता का झटका
NCS के रिकॉर्ड के मुताबिक, 22 अक्टूबर की रात चीन में 5.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसके बाद भी क्षेत्र में अन्य भूकंपीय घटनाएं रिकॉर्ड हुईं। वहीं, 23 अक्टूबर को म्यांमार में 3.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसकी गहराई लगभग 99 किलोमीटर बताई गई है।
हालांकि, इन अलग-अलग घटनाओं से चीन और म्यांमार में हुए नुकसान या जनहानि के बारे में उपलब्ध आंकड़ों से स्पष्ट पुष्टि नहीं होती है।
क्यों आता है इतना शक्तिशाली भूकंप?
भूकंप पृथ्वी की बाहरी परत में मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण आते हैं। जब प्लेटों के बीच दबाव जमा होता है और चट्टानें अचानक खिसकती हैं, तो ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में बाहर निकलती है। इससे जमीन में कंपन पैदा होता है।
हिमालय और उसके आसपास का क्षेत्र भारतीय तथा यूरेशियन प्लेटों की परस्पर गति के कारण भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है।
राहत और बचाव कार्य जारी
भूकंप से प्रभावित तिब्बत के इलाकों में बचाव और राहत कार्य शुरू किए गए हैं। अधिकारियों के सामने घायलों को सहायता पहुंचाने, क्षतिग्रस्त मकानों की जांच करने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने की चुनौती है। कई आफ्टरशॉक आने के कारण कमजोर हो चुकी इमारतों से दूर रहना और आधिकारिक निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण है।
फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है। मृतकों और घायलों की संख्या शुरुआती रिपोर्टों पर आधारित है; राहत अभियान और नुकसान का आकलन आगे बढ़ने के साथ आंकड़ों में बदलाव हो सकता है।
