नहाए खाए के साथ आस्था का महापर्व छठ पूजा आज से शुरू, छठ व्रती इन बातों का रखें ध्यान, पड़े पौराणिक कथा….

सूर्य की उपासना और आस्था का महापर्व छठ पूजा आज से नहाय-खाय के साथ शुरू हो रहा है। इसमें महिलाएं अपने संतान की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस दौरान व्रती को विशेष ध्यान देना चाहिए।

आज नहाय-खाय के साथ शुरू होकर आस्था का महापर्व छठ पूजा 31 अक्टूबर को उगते सूर्य को जल अर्पण करने के साथ समाप्त होगा। आएइ जानते हैं कि छठ का व्रत रखने वालों को किन बातों का ध्यान देना चाहिए।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य को अर्घ्य देते देते समय सारा सामान बांस के बने सूप में ही रखें और सूप में ही दीपक जलाएं। उसके बाद गंगा या किसी पवित्र नदी में उतकर सूर्य को अर्घ्य दें।

व्रत रखने वाले लोग इस दौरान किसी भी अनुष्ठान का पूजा में शामिल होने से पहले स्नान जरूर करें। स्नान के बाद ही किसी भी शुभ कार्य में शामिल हो।

छठी माता की पूजा के दौरान बांस के बने सूप का ही उपयोग करें। रात में सोने से पहले व्रत कथा जरूर सुनें। सूर्य को दूध भी अर्पण कर सकते हैं। स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर ही छठी माता के लिए प्रसाद बनाएं। व्रत के दौरान किसी भी प्रकार का किसी से विवाद न करें।

छठी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार राजा प्रियव्रत के कोई संतान नहीं था, जिस कारण वह हमेशा दुखी रहते थे। इससे दुखी होकर राजा महर्षि कश्यप के पास गए। महर्षि ने राजा को संतान प्राप्ति के लिए यज्ञ करने को कहा। राजा ने यज्ञ किया और रानी मालिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया लेकिन वह पुत्र मृत पैदा हुआ।

इस बात से राजा बहुत दुखी हो गए। तभी आकाश के एक विमान उतरा और उसमे छठी माता विराजमान थी। अपना परिचय देते हुए उन्होंने कहा कि मैं ब्रह्मा की मानस पुत्री छठी हूं। माता छठी ने राजा से कहा कि मैं सभी संतानों की रक्षा करती हूं और संतान प्राप्ति का वरदान देती हूं।

फिर छठी माता ने मृत शिशु को जीवित कर दिया। इससे प्रसन्न होकर राजा ने छठी माता की उपासना की। कहा जाता है कि इसके बाद से ही इस व्रत को किया जाने लगा।

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