पटरी पर लौटती जिंदगी के बीच रेल सेवा को सामान्य करने की मांग, आम लोग के साथ जनप्रतिनिधि भी लगा रहे गुहार

कोरोना काल का सबसे ज्यादा असर रेल यातायात पर पड़ा है. कोविड-19 के बेहद बुरे दौर के बाद जहां जिन्दगी पटरी पर आ रही है, लेकिन रेल सुविधा के लिए आज भी जनता और जनप्रतिनिधि संघर्ष कर रहे है. अन्तर्राज्यीय यात्रा एवं दैनिक यात्रियों के लिए बहुत बड़ा साधन ठप होने से जिले की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर नजर आ रहा है. अब रेल सुविधा बहाल करने की मांग तेज होती जा रही है.

महासमुंद जिले को ओडिसा से जोड़ने वाली रायपुर-वाल्टेयर रेलवे लाइन पर दर्जनों ट्रेन चलती थी. महासमुंद जिले के पांच ब्लॉकों में से सिर्फ दो ब्लॉक – महासमुंद और बागबाहरा में ही रेल की सुविधा है. स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ जरूरी कामकाज के लिए आम लोग, व्यापारियों और शासकीय और निजी संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए रायपुर और न्यायधानी जाने के लिए सिर्फ ट्रेन का ही सहारा है.

कोविड-19 के चलते 2019 से इस रूट की पुश पुल, पैसेन्जर 58529 अभी तक बंद है. कोरबा लिंक एक्सप्रेस 08518 को स्पेशल ट्रेन बनाकर चलाया जा रहा है, जो बागबाहरा स्टेशन पर नहीं रूक रही है. पुरी-अहमदाबाद भी बागबाहरा रेलवे स्टेशन में नहीं रूकती है. एक समय था जब बागबाहरा रेलवे स्टेशन में रोजाना 6 हजार रुपए की टिकट बिक्री हुआ करती थी, लेकिन आज एक हजार रुपए की भी बिक्री नहीं है. जनप्रतिनिधि व यात्री कोविड की वजह से बंद हुई ट्रेनों को शुरू करने के बाद बंद किए गए स्टापेज को चालू करने की मांग कर रहे हैं.

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