बाल बाल बचे दर्जनों यात्री बेन्दो नदी के नंगे पुल पर आमने सामने भिड़ने से बचे बस और ट्रक

कुड़ेकेला :- खरसिया से पत्थलगांव जा रही एक सवारी बस बीते सुबह मौत के मुहाने से लौट आई। छाल क्षेत्र के कुड़ेकेला के पास स्थित बेन्दो नदी के जर्जर और बिना साइड रेलिंग वाले नंगे पुल पर एक बड़ा हादसा होते होते टल गया। पुल के ठीक बीचों बीच सवारी बस और सामने से आ रहे कोयला लोड भारी भरकम ट्रक के बीच महज कुछ इंचों का फासला रह गया और दोनों वाहन आपस में रगड़ा गए।


मानिकपुर खदान से आ रहा था कोयला लोड ट्रक:-
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह के समय सवारी बस अपने निर्धारित समय पर खरसिया से पत्थलगांव की ओर रवाना हुई थी। जैसे ही बस बेन्दो नदी के संकरे और बिना रेलिंग वाले पुल पर पहुँची ठीक सामने से मानिकपुर कोरबा खदान से टी.आर.एन. प्लांट के लिए भारी मात्रा में कोयला ले जा रहा एक ट्रक आ गया।


चीख पुकार और थमी सांसें:-पुल पर जगह कम होने और सुरक्षा रेलिंग न होने के कारण दोनों वाहन एक दूसरे के बेहद करीब आ गए और आपस में सट गए। बस में सवार यात्रियों की सांसें थम गईं और मौके पर चीख पुकार मच गई। अगर जरा सी भी चूक होती या गाड़ी का संतुलन बिगड़ता तो यात्रियों से भरी बस सीधे बेन्दो नदी के गहरे पाट में समा जाती और एक भयानक तबाही देखने को मिलती।


चालकों की जांबाजी और सूझबूझ ने बचाई जानें:-
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मंजर के बीच दोनों वाहनों के चालकों ने अदम्य साहस और ठंडे दिमाग से काम लिया। चालकों ने संयम बनाए रखते हुए गाड़ियों को बेहद सावधानी से धीरे धीरे आगे पीछे करके निकाला। चालकों की इसी सूझबूझ के चलते दर्जनों जिंदगियां अकाल मौत के गाल में समाने से बच गईं।


प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल:-हादसा भले ही टल गया हो लेकिन इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और निर्माण विभाग की पोल खोलकर रख दी है। बिना साइड रेलिंग का यह बेन्दो नदी का पुल रोज हजारों मौतों को न्योता दे रहा है। ग्रामीणों में भारी रोष है कि आखिर क्यों इतने संवेदनशील पुल पर अब तक सुरक्षा घेरा या रेलिंग नहीं लगाई गई है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे और लाशों के ढेर का इंतजार कर रहा है।

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