महानदी जल विवाद सुलझाने की कोशिश तेज, 1 अक्टूबर को अमित शाह की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के CM की बैठक
रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल बंटवारे के विवाद को सुलझाने के प्रयासों में तेजी आई है। 1 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की बैठक प्रस्तावित है। इसकी जानकारी ओडिशा के महाधिवक्ता पीतांबर आचार्य ने दी है।
बैठक में महानदी के जल बंटवारे और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर दोनों राज्यों के पक्षों पर चर्चा होने की संभावना है। ओडिशा के महाधिवक्ता के अनुसार, बातचीत के जरिए दोनों राज्यों के बीच आपसी सहमति से समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना बनी है। केंद्रीय जल आयोग के सचिव ने पिछली बैठकों से संबंधित जानकारी महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत की है, जिसे ट्रिब्यूनल ने रिकॉर्ड पर लिया है।
20 सितंबर को दोनों मुख्यमंत्रियों की हुई थी मुलाकात
इस बैठक से पहले 20 सितंबर को भुवनेश्वर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की मुलाकात हुई थी। दोनों नेताओं ने एक घंटे से अधिक समय तक विभिन्न मुद्दों के साथ महानदी जल विवाद पर भी चर्चा की थी। मुलाकात के बाद सीएम साय ने समाधान की दिशा में बातचीत आगे बढ़ने और जल्द रास्ता निकलने की उम्मीद जताई थी।
30 जुलाई को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में हुई थी बैठक
महानदी विवाद के समाधान को लेकर 30 जुलाई को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में भी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई थी। केंद्र सरकार के अनुसार, बैठक का उद्देश्य संवाद, तकनीकी सहयोग और आपसी सहमति के माध्यम से विवाद का समाधान तलाशना था। उस बैठक में केंद्रीय जल आयोग और दोनों राज्यों के तकनीकी अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया था।
महानदी जल विवाद से जुड़ा मामला 2018 से महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित है। वहीं, दोनों राज्यों के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत और केंद्रीय जल आयोग के माध्यम से विचार-विमर्श जारी है।
कृषि, सिंचाई और उद्योग से जुड़ा अहम मुद्दा
महानदी का पानी दोनों राज्यों के लिए कृषि, सिंचाई, उद्योग और अन्य जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में जल बंटवारे को लेकर होने वाली आगामी बैठक को दोनों राज्यों के बीच चल रही बातचीत की अगली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
फिलहाल 1 अक्टूबर की बैठक से किसी अंतिम समझौते की घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है। बैठक में आगे की बातचीत और समाधान की दिशा तय होने की उम्मीद जताई गई है।
