
चौक-चौराहों पर लगी आकर्षक पिचकारियां व रंग-गुलाल की दुकानें
बलौदाबाजार,
फागुलाल रात्रे, लवन।
फागुलाल रात्रे, लवन।
लवन नगर के चौक-चौराहों में रंगों के पर्व होली से संबंधित सामग्री की दुकानें सजकर तैयार हैं। जिनमें रंग-गुलाल के अलावा नकली बाल, मुखौटों सहित विगत वर्ष प्रचलन में आए हुए है। पिचकारियों में विभिन्न प्रकार के चित्र अंकित कर बाजार में बेचने के लिए सजाया गया हैं।
इन दुकानों पर नकली मुखौटे एवं रंग-गुलाल सहित कामेडी एवं डरावने रूप धारण करने के लिए विभिन्न प्रकार के महिला एवं पुरूष के नकली बाल बाजार में आसानी से बिक रहे हैं। इनके साथ ही इन दुकानों पर विभिन्न प्रकार की रंग-बिरंगी टोपियां भी बिक रही हैं। जिनमें से कई टोपियों में बैटरी जड़ित लाइट जलाने की व्यवस्था भी निर्माणकर्ता द्वारा की गई हैं। साथ ही विभिन्न प्रकार के नगाड़े एवं ताशे सहित अन्य वाद्ययंत्र को दुकानों में सजाकर कर रखा गया है। जिसे देख मन लुभाने लगते है, एक समय था जब होली के दिन लोग टोलियां बनाकर नगाड़े के थाप पर नगर भ्रमण करते हुए अपने से बड़ों को रंग-गुलाल लगाकर उनसे आशीर्वाद लेते थे। यह प्रथा अब दिखाई नहीं देती। वहीं होलिका दहन स्थल पर दहन रात्रि से पूर्व ही नगाड़ों के साथ फागुन गीत गाए जाते थे, जो आज की आधुनिकता में विलुप्त होकर रह गए हैं। अब लोगों द्वारा होली को छोटे बच्चों का त्यौहार मानकर उन्हें उनकी मांग अनुसार रंग-गुलाल पिचकारी दिलाकर उन्हें होली खेलने के लिए दे दिए जाते हैं। इस दिन ग्रामीण क्षेत्रों में पुरानी रंजिश को लेकर बड़ी घटनाएं होना भी आम बात हो गई हैं। जिससे ऐसा मेहसूस होता हैं कि अपना बदला लेने के लिए लोग सालभर इस त्यौहार का इंतजार करते हैं और इस दिन अपनी रंजिश को भूलाने के लिए किसी भी प्रकार की हरकत करने से बाज नहीं आते हैं। जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिवर्ष होली के दिन अप्रिय घटना के घटित होने के समाचार सुनने एवं दिखने को मिलते हैं।




