
विधानसभा में सवाल, शराब दुकानों पर 15 अगस्त और 26 जनवरी को झंडा क्यों नहीं फहराती सरकार?
रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा में मानसून सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही भी हंगामे के साथ ही शुरू हुई. प्रश्नकाल के दौरान बीजेपी विधायक नारायण चंदेल ने बिना परमिट और अधिक दर पर शराब बेचने का मामला उठाया. विधायक चंदेल ने नकली शराब बेचे जाने का भी आरोप लगाया. विधायक का आरोप था कि अवैध शराब और शराब में पानी मिलाने का मामला आने के बाद भी बिना मुकदमा दर्ज किये आरोपियों को छोड़ दिया गया. इसके अलावा शराब से जुड़े अन्य आरोप भी लगाए गए.
जवाब में आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि कोई गड़बड़ी नहीं है. जांजगीर जिले में एक शिकायत शराब में पानी मिलाने की मिली थी. एक व्यक्ति पर एफआईआर की गयी और सब इंस्पेक्टर को हटाया गया और आबकारी विभाग के अधिकारी को शो कॉज नोटिस दिया गया है. रायगढ़ जिले में शराब में पानी मिलाने के पांच प्रकरण आये थे, जिनमें में दो में प्रकरण दर्ज किये गये गये. 8 दोषी अधिकारियों को हटाया गया. बिलासपुर में सात शिकायतें आईं, जिनमें से एक सही पाया गया. 4 अधिकारियों को हटाया गया, एक पर एफआईआर की गइ है. जांच की जरूरत नहीं है.
प्लेसमेंट एजेंसी को हटाया गया
सदन में मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि रायगढ़ में प्लेसमेंट एजेंसी को हटाया गया, जिला स्तर के अधिकारी को शो कॉज नोटिस जारी किया गया. इसपर विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने पूछा कि शराब में पानी मिलाने की जांच की कोई प्रक्रिया है क्या? इसपर मंत्री मो अकबर ने कहा कि मिलावट की जांच के लिए लैब है. हाइड्रोमीटर और थर्मामीटर से जांच होती है. इस पर विपक्ष के विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा कि सारी शराब दुकानों में दो पेटियां होती हैं. 1 पेटी में परमिट के शराब का हिसाब किताब रखा जाता है और दूसरे में बिना परमिट के शराब का हिसाब किताब होता है. 75 प्रतिशत शराब बीना परमिट के बिकती है। जिससे एक्साइज़ की चोरी होती है.
दुकानों पर तिरंगा क्यों नहीं फहराते
झारखंड में आबकारी पॉलिसी के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कारपोरेशन को कंसलटेंट बनाए जाने का मामला सदन में उठा. जेसीसीजे विधायक धर्मजीत सिंह ने मामला उठाया. उन्होंने पूछा कि कैबिनेट में इस विषय पर चर्चा हुई. क्या झारखंड सरकार ने लिखित में कन्सल्टेंसी मांगी थी? आबकारी मंत्री की तरफ़ से जवाब देते हुए मो.अकबर ने कहा- हर बात लिखित में नहीं होती. मौखिक में भी होती हैं. झारखंड से आए अधिकारियों के दल ने लिखित में कन्सल्टेंसी की डिमांड की थी. जेसीसी विधायक प्रमोद शर्मा ने कहा- सरकार शराब दुकानों को जब सरकारी सम्पत्ति मानती है तो फिर 15 अगस्त और 26 जनवरी को वहां झंडा क्यों नहीं फहराया जाता?


