सुप्रीम कोर्ट : राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी पुनर्गठन के निर्देश; CJI ने कहा- “राजनीतिकरण न करें, यह साधारण अपराध है”
नई दिल्ली: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी से जुड़े सनसनीखेज मामले में सोमवार (20 जुलाई) को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए विशेष जांच टीम (SIT) का पुनर्गठन करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार नई एसआईटी जांच से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगी।
सॉलिसिटर जनरल की दलील और अब तक की कार्रवाई
सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी कि:
- मामले की जांच तेज गति से आगे बढ़ रही है।
- पुलिस इस मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
- जांच एजेंसी की तफ्तीश में यह स्पष्ट हुआ है कि यह पूरी तरह से एक संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) है, जिसके तहत पुलिस को बिना वारंट के कार्रवाई का अधिकार है।
CJI की दो टूक: “राजनीति का अखाड़ा न बनाएं”
सुनवाई के दौरान पीठ ने मामले को लेकर हो रही बयानबाजी पर गहरी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे का किसी भी रूप में राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।
पीठ ने सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा, “अदालतें राजनीति करने की जगह नहीं हैं, यह सीधे तौर पर एक साधारण आपराधिक मामला है।” कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि वे यह पता लगाएं कि क्या मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता के लिए किसी अन्य वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की अगुवाई में एक नई एसआईटी का गठन किया जा सकता है। इस पर एसजी तुषार मेहता ने सहमति जताते हुए नई टीम गठित कर रिकॉर्ड पर रखने की बात कही।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि मामले की सही दिशा में और निष्पक्ष जांच हो। उत्तर प्रदेश सरकार अब 27 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में एसआईटी के पुनर्गठन और जांच की प्रगति पर विस्तृत जानकारी कोर्ट के सामने रखेगी।



