अंबिकापुर : बच्चे को एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगाने के मामले में सिद्धार्थ हॉस्पिटल की फार्मेसी सील, 3 वायल मिले
कलेक्टर की शिकायत पर जांच, उसी बैच के एक्सपायर्ड इंजेक्शन मिलने के बाद प्रशासन ने की कार्रवाई
अंबिकापुर, 9 सितंबर 2026। सिद्धार्थ हॉस्पिटल में भर्ती एक बच्चे को कथित तौर पर एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगाए जाने के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई की है। जांच के दौरान अस्पताल की फार्मेसी में उसी बैच के तीन एक्सपायर्ड इंजेक्शन वायल मिलने के बाद फार्मेसी को 15 दिनों के लिए सील कर दिया गया है। फार्मेसी संचालक को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा गया है।
तीन साल से अधिक उम्र के बच्चे को लगाया गया था इंजेक्शन
मामला सरगुजा जिले के लखनपुर क्षेत्र से जुड़ा है। शम्स खान ने अपने करीब 3.6 वर्षीय बेटे उमैर खान को 6 सितंबर 2026 को सिद्धार्थ हॉस्पिटल में भर्ती कराया था।
शिकायतकर्ता के अनुसार, चिकित्सक डॉ. वैभव जायसवाल की पर्ची के आधार पर बच्चे को Amikacin 250 mg इंजेक्शन लगाया गया।
अगले दिन इंजेक्शन की शीशी की जांच करने पर उस पर बैच नंबर L-24E-5B, निर्माण तिथि 05-2024 और एक्सपायरी तिथि 04-2026 दर्ज मिली। यानी बच्चे को लगाए जाने के समय इंजेक्शन की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी।
कलेक्टर के निर्देश पर शुरू हुई जांच
मामले की शिकायत बच्चे के पिता ने कलेक्टर अजीत वसंत से करते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की। शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर ने सरगुजा CMHO डॉ. पीएस मार्को को मामले की जांच के निर्देश दिए।
CMHO के निर्देश पर नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. पीके सिन्हा और ड्रग इंस्पेक्टर अनिल पैकरा की टीम अस्पताल पहुंची और फार्मेसी में उपलब्ध दवाओं की जांच की।
जांच में उसी बैच के 3 एक्सपायर्ड वायल मिले
जांच टीम को अस्पताल की फार्मेसी में उसी बैच नंबर के तीन एक्सपायर्ड इंजेक्शन वायल मिले, जिसका इंजेक्शन बच्चे को लगाए जाने की शिकायत की गई थी।
बैच नंबर के मिलान के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए फार्मेसी के खिलाफ कार्रवाई की।
15 दिन के लिए फार्मेसी सील
ड्रग इंस्पेक्टर अनिल पैकरा की ओर से की गई कार्रवाई के तहत अस्पताल की फार्मेसी को 15 दिनों के लिए सील कर दिया गया है। साथ ही फार्मेसी संचालक को नोटिस जारी कर पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
संचालक का जवाब मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
दवा देने से लेकर लगाने तक कई स्तरों पर जांच
मामले में अब यह भी जांच का विषय है कि एक्सपायर्ड इंजेक्शन फार्मेसी में कैसे मौजूद था और वह बच्चे तक कैसे पहुंचा। दवा की खरीद, फार्मेसी से जारी किए जाने और बच्चे को लगाए जाने की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
सामान्य तौर पर इंजेक्शन देने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और दवा की स्थिति की जांच की जाती है। इस मामले में इन प्रक्रियाओं का पालन हुआ था या नहीं, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा।
बच्चे की स्थिति पर भी नजर
प्रशासनिक कार्रवाई के साथ अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि बच्चे को लगाए गए इंजेक्शन का उसके स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ा या नहीं। इस संबंध में चिकित्सकीय स्थिति और अस्पताल के रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है।
फिलहाल प्रशासन ने फार्मेसी को सील कर दिया है और नोटिस के जवाब के बाद आगे की कार्रवाई का इंतजार है।












