जशपुर शिक्षा विभाग की नई पहल: ‘नींव’ से सादरी भाषा में सीखेंगे नौनिहाल
मातृभाषा और विद्यालयीन भाषा के बीच की दूरी होगी कम
कुनकुरी और बगीचा विकासखंड के 202 प्राथमिक विद्यालयों में शुरू होगा बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम
जशपुर। प्रारंभिक कक्षाओं के बच्चों की सीखने की क्षमता को मजबूत करने और घर तथा विद्यालय की भाषा के बीच की दूरी को कम करने के उद्देश्य से जशपुर जिले में ‘नींव’ बहुभाषी शिक्षा (MLE) कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है। इस पहल के तहत कुनकुरी और बगीचा विकासखंड के कुल 202 प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 1 एवं 2 के बच्चों को उनकी मातृभाषा ‘सादरी’ के माध्यम से बुनियादी शिक्षा प्रदान की जाएगी।
बगीचा के 119 विद्यालय पहले चरण में शामिल
कार्यक्रम के प्रथम चरण में बगीचा विकासखंड के 18 संकुलों के 119 प्राथमिक विद्यालयों को शामिल किया गया है। बच्चों को उनकी परिचित घरेलू भाषा सादरी में पढ़ने, लिखने और संवाद करने के पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे। इससे बच्चों में कक्षा की गतिविधियों के प्रति रुचि और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलेगी।
शिक्षकों का पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण संपन्न
कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 8 से 12 सितंबर तक बगीचा में पांच दिवसीय सघन प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण तीन बैचों में संचालित हुआ, जिसमें लगभग 41-42 शिक्षकों के समूह बनाए गए।
दो प्रशिक्षण बैच शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बगीचा तथा तीसरा बैच शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, पंडरापाट में आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बहुभाषी कक्षा प्रबंधन, बच्चों से सहज संवाद, मौखिक भाषा विकास, स्थानीय संदर्भ आधारित कहानियों, कविताओं एवं चित्रों के उपयोग तथा बच्चों को घरेलू भाषा सादरी से मानक शालेय भाषा हिंदी की ओर सहज रूप से जोड़ने की व्यावहारिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
अधिकारियों का मिला मार्गदर्शन और सहयोग
प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन में बगीचा विकासखंड के विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री सुदर्शन सिंह पटेल एवं खंड स्रोत समन्वयक श्री कृष्ण कुमार राठौर का सतत मार्गदर्शन एवं विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।
अकादमिक स्तर पर प्रशिक्षण जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) द्वारा चयनित जिला स्रोत समूह (DRG) के सदस्यों तथा लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF) के तकनीकी सहयोग से संपन्न कराया गया।
मातृभाषा बनेगी बच्चों की सीखने की ताकत
‘नींव’ कार्यक्रम का मूल उद्देश्य बच्चों की घरेलू भाषा को सीखने का मजबूत आधार बनाना है। अपनी परिचित भाषा में बच्चे जब सहजता से विचार व्यक्त करते और पाठ्यवस्तु को समझते हैं, तो विद्यालय की औपचारिक भाषा हिंदी सीखने में भी उन्हें आसानी होती है।
बगीचा क्षेत्र में सादरी भाषा के व्यापक प्रचलन को ध्यान में रखते हुए स्थानीय परिवेश, संस्कृति, लोककथाओं और गीतों पर आधारित शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) तैयार की गई है।
अब स्कूलों में दिखेगा ‘नींव’ का असर
पांच दिवसीय प्रशिक्षण के बाद अब विद्यालय स्तर पर बहुभाषी शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों का नियमित संचालन शुरू किया जाएगा। शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से बच्चों के मौखिक अभिव्यक्ति, पठन कौशल, समझ एवं सीखने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
‘नींव’—बच्चे की अपनी भाषा से सीखने की मजबूत शुरुआत।

